सुमन की माँ के गुजरे आज बहुत साल हुए । अपने दुल्हन वाले लहंगा में सुमन अपने माँ के फोटो को देख रही थी । आँखों से आँसू नहीं थम रहे थे । आज उसे अपने माँ की बहुत याद आ रही थी । अपने माँ के जाने के बाद की सारी बाते सुमन को याद आने लगी ।
जब सुमन ४ साल की थी । उसकी माँ का एक कार एक्सीडेंट में मौत हुई । श्याम जी अपनी बेटी सुमन से बेहद स्नेह रखते थे उसे अकेलापन महसूस न हो इसीलिए उन्होंने फौरन अपनी दूसरी शादी रचा ली ।
और इस तरह स्मिता उस घर में श्याम जी की पत्नी, और सुमन की सौतेली माँ बनकर इस घर में आयी । सुमन के शुरुवात के कुछ दिन तो माँ के मातम में ही बीते ।
वो छोटी थी लेकिन उसे माँ की यादें खल रही थी । स्मिता तो बहुत ही स्ट्रिक्ट किसम की महिला थी । थोड़े महीनों बाद स्मिता और श्याम को बेटी हुई । वो बेटी अपने माँ स्मिता की तरह ही बेहद सुंदर थी इसीलिए उसका नाम उन्होंने मीनाक्षी रख दिया ।
कुछ साल बित गए । सब अच्छा चल रहा था । सुमन अब कॉलेज जाने लगी थी तो मीनाक्षी अभी स्कूल में थी । दोनों बहनों में बहोत लगाव था । दोनों में काभी झगड़ा नहीं होता था ।
लेकिन दोनों अपने माँ से बहुत डरती थी । क्योंकि स्मिता को कोई गलती बर्दाश्त नहीं होती थी ।
दोनों बहने स्मिता के गाइडन्स में बढ़ रही थी । स्मिता उन्हे घर के सारे काम सिखाती थी ।
मीनाक्षी का आवाज भी अच्छा था उसे एक बड़े म्यूजिक क्लास पे भेज दिया तो सुमन बहुत डरपोक और शांत रहनेवाली थी इसीलिए उसे स्पोर्ट्स क्लास में भेजने लगे ।
सुमन को ये बात बिल्कुल याची नहीं लगी । खुद के बेटीको अच्छे क्लास में और मुझे स्पोर्ट्स क्लास में जहाँ फीस भी बहट कम रहती है और थकावट ज्यादा । सौतेली माँ को वो कुछ नहीं कह सकती थी
स्पोर्ट्स क्लास में जाने के बाद भी सुमन का घर का काम करना बंद नहीं हुआ ।
क्लास से वापस आते ही स्मिता दोनों बहनों को घर के कामों में लगा देती । झाड़ू पोंछा से लेकर कपड़े बर्तन धोना ये सब काम सुमन और मीनाक्षी करती थी ।
स्मिता सिर्फ खाना बनाती थी ।
मोनाक्षी की अच्छी रियाज की वजह से वो एक बहुत बड़े म्यूजिक बैंड में शामिल हुई तो सुमन अपने स्पोर्ट्स कोटे से एयर इंडिया में नोकरी लग गयी ।
सुमन मन ही मन में अपने सौतेली माँ का द्वेष करने लगि थी । जायज है अपने खुद के सगी बेटी को इतना प्यार और मुझ से ये भेदभाव क्यों?
ऐसे ही कुछ दिन बित गए ।
रविवार का दिन था । सुमन को छुट्टी थी । श्याम और स्मिता ने सुमन को अपने कमरे में बुलाया ।
स्मिता ने उसे पूछा ।
“हमने तुम्हारे लिए एक लड़का देख रखा है, अपने पड़ोस वाला सचिन कैसा लगता है तुम्हें ?”
डायरेक्ट अपने रिश्ते की बात सुन के सुमन घबरा गयी । घबराहट में वो वह से चली गयी । लेकिन श्याम और स्मिता को लगा के वो शर्मा रही है और उसे ये रिश्ता पसंद है । और २ दिनों में ही उन्होंने सचिन और उसकी माँ को घर बुलाकर रिश्ते की बात पक्की कर ली ।
पर सुमन इस बात से खुश नहीं थी । वो किसी और से प्यार करती थी । राहुल उसी के ऑफिस में काम करता था । शुरुवात के दिन जान पहचान हुई और ये मुलाकात कब प्यार में बदल गयी दोनों को पता ही नहीं चला । सुमन अपने पापा से ये बात कहने वाली थी । । लेकिन डर के मारे घरवालों से यह बात कह न सकी । उस दिन रो रो कर उसका बुरा हाल हो गया उसे अपने आप से ही चीड़ आने लगी । अपने खुद के हक के लिए वो इतना भी नहीं कर सकती थी । उस रात उसे नींद भी नहीं आयी । उसने ये बात राहुल को भी नहीं बताई की उसकी शादी तय हो चुकी है । सुबह उसकी आकन्हे सूज गयी थी । मीनाक्षी को ये बात कुछ हजम नहीं हुई , उसने अपने माँ से ये बात कह डाली की दीदी आंखे सूजी हुई है ।
लेकिन स्मिता ने यह कहकर बात टाल दी की बेचारी काम करकर थक गयी होगी और उसे आराम भी नहीं मिला होगा । सुमन के होने वाले पट्टी सचिन ने UPSC की एक्जाम दी थी इस हफ्ते उसका रिजल्ट आया तो उसका पास ही के जिले में जिलाधिकारी की तौर पर सिलेक्शन हो गया था। अब सब खुशिया मना रहे थे लेकिन एक सुमन ही थी जो इन सब से खुश नहीं थी ।
थोड़े दिन बाद सचिन उनके घर आ गया । उसके ऐसे अचानक से आ जाने से सब चोंक गए ।
सुमन भी घर पर ही थी ।
सचिन ने बिना डरे स्मिता जी कह दिया ।
“मुझे आपकी बेटी मीनाक्षी पसंद है मैं सुमन से शादी नहीं कर सकता”
सबसे पहले तो सब शॉक हो गए । स्मिता जी ने तो बिना देर लगाए । इस बात को हाँ कर दी ।
उसी दिन सुमन का प्रेमी राहुल उनके घर आया और उसने सुमन के लिए अपनी जो भी भावना है वो कह डाली ।
स्मिता जी इसके लिए भी राजी हो गयी । सुमन भी अचानक आयी इस खुशी से खिल उठी पर मन के किसी कोने में उसे ये बात खलती रही की सचिन अगर जिलाधिकारी के तौर पर सिलेक्ट नहीं होता तो क्या स्मिता इस रिश्ते के लिए मानती?
हमेशा अपने ही बेटी की बारे में अच्छा सोचने वाली स्मिता से उसे और भी घृणा होने लगी ।
शादी के दिन नजदीक आ रहे थे ।
और एक ही मंडप पे मीनाक्षी और सुमान की शादी हो गयी । सुमन खुश थी लेकिन अपने सौतेली माँ से बहुत खफा थी ।
विदाई के दिन सिर्फ वो पापा को गले लगाकर रोयी । स्मिता के तरफ उसने देखा भी नहीं ।
ऐसे कुछ दिन बीत गए घर पर अब सिर्फ स्मिता और श्याम ही थे ।
अचानक से स्मिता के पेट में दर्द होने लगा । अस्पताल में जाकर पता चला की उनके पेट की आंतड़िया सूज गयी है और ऑपरेशन के अलावा कुछ और रास्ता नहीं है ।
स्मिता को अपस्तल में भर्ती करवाया ।
मीनाक्षी और सुमन को कॉल लगाया गया । मीनाक्षी फौरन अस्पताल में पहुची लेकिन सुमन ने जान बूझकर वहाँ जाना टाल दिया । जब श्याम जी का तीसरी बार उसे फोन आया तो मजबूरन उसे अस्पताल जाना पड़ा । तब तक ऑपरेशन शुरू हो चुका था । मीनाक्षी, सचिन राहुल और सुमन वही पर बैठे हुए थे । डॉक्टर साब ऑपरेशन कर के आए ।
“अभी कुछ कह नहीं सकते अगले २४ घंटे मरीज के लिए बहुत इम्पॉर्टन्ट है”
मीनाक्षी अब रो रही थी । सचिन उसे धीरज बंधा रहा था ।
सुमन को इसका कोई ग़म या खुशी नहीं थी वो तो सिर्फ फॉर्मैलिटी के तौर वर वहाँ आयी थी ।
शाम ने उसकी तरफ देखा ।
“बेटा, क्या तुम थोड़े देर के लिए बाहर आ सकती हो?”
“जी पापा”
ऐसा कहकर सुमन उनके पीछे पीछे जाने लगी । अस्पताल के कैन्टीन पहुचे ।
“तुमने आने में देर क्यों कर दी सुमन?”
“बस कीजिए पापा! आपको पता है न उस औरत ने मेरे साथ कितना जुल्म किया है?”
“ये तुम्हारी गलतफहमी है बेटा! आज मैं तुम्हारी सारी गलतफहमी मिटा देता हु”
और फिर श्याम उसे हकिकत बताने लगे ।
तुम बहुत छोटी थी जब मैंने स्मिता से शादी की ।

हम दोनों ने फैसला लिया था की तुम्हारे बाद हम कोई बच्चा नहीं होने देंगे लेकिन तुम्हारी दादी बहुत जिद्दी थी उसे पोता चाहिए था । इसीलिए उसके जिद के आगे हार मानकर दूसरा बच्चा होने दिया । लेकिन दूसरी भी लड़की हुई इसीलिए तुम्हारी दादी हमसे रूठ कर गाव चली गयी ।
धीरे धीरे दिन ढलते गए । तुम बढ़ी होती गयी ।
तुम्हें याद होगा तुम दसवी कक्षा में थी । तुम्हारा किस लड़की के साथ झगड़ा हुआ । उस लड़की ने तुम्हें बहुत मारा ये बात जब तुमने घर पर बताई तब स्मिता तुम पर ही चिल्लाई ।
तब तुम्हें लगा की सौतेली माँ इसीलिए तुम्हें डांटा लेकिन वो तुम्हें मजबूत बनाना चाहती थी इसीलिए उसने तुम्हें स्पोर्ट्स क्लास में जोइन कर दिया उसी स्पोर्ट्स कोटे की वजह से तुम्हें एक अच्छी नोकरी भी मिली ।
वो तुम्हें घर के सारे काम करने को कहती थी लेकिन तुम ये भूल रही हो की मीनाक्षी भी गघार के सारे काम करती थी । जो चीज मैं मीनाक्षी के लिए लता था वही चीज स्मिता मुझे तुम्हारे लिए लाने को कहती थी ।
जब तुम्हारे रिश्ते के बात हमने तुमसे की तब तुम्हारा घबराना हमे दिखा ही नहीं हमे लगा तुम शरमा रही ही इसलिए हमने सचिन से तुम्हारे शादी की बात की । जिस दिन मीनाक्षी ने स्मिता से कहा की दीदी की आंखे सूज गयी है तब स्मिता को शक हुआ इसीलिए उसने सचिन से कहकर तुम्हारी सारी जानकारी लेने को कहा ।
और तब हम सबको सच पता चला फिर हम सबने प्लान बनाकर ये शादी रोक दी इस प्लान में तुम्हर राहुल भी शामिल था ।
रविवार के दिन सचिन घर आया उसने ये शादी तोड़ दी उसी दिन राहुल घर आकार तुम्हारा हाथ मांगने लगा ये सब स्मिता का प्लान था ।
तुम्हारे खुशी के लिए उसने सारे लोगों को ताने सुने ।
विदाई के वक्त जब तुमने उसे इग्नोर किया तब सबसे ज्यादा बुरा मुझे ही लगा । तुमने आजतक उसे कभी स्वीकार नहीं क्या । कभी माँ कहकर नहीं पुकारा लेकिन वो हमेशा से ही तुम्हें अपने सगी बेटी ही मानती रही
आज सुबह जब अस्पताल में उसके बीमारी के बारे में पता चला । तबब से उसका एक ही नाम जुबान पर था और वो था तुम्हारा ।
वो सुबह से कह रही थी । मुझे सुमन से मिलना है लेकिन तुम तो जैसे पत्थर की बनी हो”
अपने पिता के मुह से ये सब सच सुनकर सुमन वही पर जोर जोर से रोने लगी ।
श्याम जी ने उसे शांत किया ।
वो दौड़कर स्मिता के बेड के पास आयी ।
स्मिता की आंखे बंद थी अभी भी वो शायद होश में नहीं आयी थी ।
सुमन के आँख का एक आँसू स्मिता के गालों पर पड़ा ।
“मुझे माफ कर दो माँ !”
सुमन सिर्फ इतना ही कह सकी ।
स्मिता के आँखों से भी आँसू गिर रहे थे लेकिन वो खुशी के आँसू थे ।
ऑपरेशन थेटर के बाहर मीनाक्षी, सचिन, राहुल और श्याम सबकी आंखे नम थी लेकिन इस बार सारी गलतफहमी दूर हो गयी थी ।
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