मालकिन

 नए घर में शिफ्ट हुए हमे सिर्फ एक हफ्ता ही हुआ था । नया घर नया माहोल सब कुछ नया नया था । १ हफ्ते बाद घर में पूजा थी । इसलिए सब भाग दौड़ कर रहे थे । घर की नई मालकिन के तौर पर सबसे ज्यादा काम मुझे ही था ।

  घर काफी बड़ा था । हमारे प्यारे डॉग ‘शेरा’ को भी बहुत बड़ी जगा थी ।

१ हफ्ते बाद जब पूजा सम्पन्न हुई सब हमने राहत से सांस ली । वैसे तो इस घर में सिर्फ हम तीन ही रहते थे । मैं, मेरे पतिदेव और हमारा ‘शेरा’ ।

कुछ दिन से शेरा बहुत ही बैचेन लग रहा था । कुछ खाता नहीं था । कल रात को तो जैसे रो रहा हो ऐसे आवाज निकाल रहा था । हमने वेटरनेरीअन याने की डॉक्टर को बुलाया सब कुछ ठीक था ।

उस दिन शेरा हमारे साथ ही सो गया । अचानक किसी आवाज से मेरी नींद खुल गयी । देखा तो शेरा नहीं था । मैं उसे ढूँढने लगी तो हाल में चुपके से बैठा था । मुझे देखते ही गुर्राने लगा । पहले शेरा काभी ऐसे बर्ताव नहीं करता था । मैं उसके पास गयी तो वो दूसरे रूम में भाग गया मैं भी उसके पीछे उस रूम में गयी । रूम में अंधेरा था । मैंने लाइट ऑन की । मैंने देखा की सामने वाला आईना अपने आप हिल रहा था । मैं उस आईने के पास गयी । मुझे दरवाजे के पीछे कुछ दिखा ।

हरी  साड़ी, माथे पर बड़ा सा  सिंदूर, भयानक जला हुआ चेहरा !

 मैं जोर से चिल्लाई !

 मेरे पति सूरज उठे । उसने मुझे पुछा क्या हुआ लेकिन मेरे पास कोई जवाब नहीं था ।

उस दिन से में भी शेरा की तरह उदास रहने लगी । सूरज मुझे से पूछते लेकिन मैं कुछ नहीं बोलती । मुझे हर बार किसी के जलने की बु आती ।

उसके बाद तो मुझे वो औरत बहुत बार दिखी  मैं हर बार डर जाती । वो किसी को क्यू नहीं दिखती थी । सिर्फ मैं ही क्यों?
और शायद शेरा भी ! मालकिन थी न घर की चिंता भी थी !

कभी कभी ये घर छोड़ने का भी मन करता लेकिन पाई पाई जोड़कर इस घर को बनाया था  ऐसे कैसे छोड़कर चले जाते ?

एक दिन हिम्मत करके सूरज को सब बता दिया । उसने भी मुझ पर पूरा भरोसा जताया ।

उसी दिन सूरज बिल्डर से मिल जिसने ये घर बनाया था । शुरुवात में तो वो डर रहा था लेकिन जैसे ही पॉलीच की धमकी दी उसने सब बता दिया ।

कुछ साल पहले यहाँ एक बूढ़ी औरत किराये पर रहती थी । अपने पोते के साथ !

उस हवेली में सिफ़ दोनों ही रहते थी ।  लेकिन उस हवेली का  मालिक बहुत ही दुष्ट था ।

कुछ  दिन बाद कुछ लोग उस मालिक के पास आए । उस हवेली को तोड़कर एक बड़ा स अपार्टमेंट बनाने के लिए उन्होंने हवेली के मालिक को बहुत ज्यादा पैसे का लालच दिया । लेकिन वो बूढ़ी औरत इस हवेली से जाने के लिए तैयार नहीं थी । तो उसने बूढ़ी औरत को जला कर मार दिया । उस हवेली का मालिक भले ही वो दुष्ट था लेकिन उसे घर बनाया था उस बूढ़ी औरत ने वो ही इस हवेली की असली मालकिन थी ।

यह कहानी सुनते ही हम लोग शॉक हो गए । हमने सब जगह पूछताछ करने पर उस औरत के पोते का पता लगा लिया वो अभी कॉलज जाता था ।

सूरज ने अपने बॉस से कहकर उसे अपने ऑफिस पर काम पर लगा लिया । उसके आगे के पढ़ाई  की भी व्यवस्था कर ली । उस पोते से उसकी दादी का फटो मँगवाकर अपने हाल में फ्रेम कराकर लगवा लिया ।

जब भी कोई पूछता है की यह किसका फोटो है तो मैं कह देती हूँ इस घर  के मालकिन का!

अब मुझे वो बूढ़ी औरत तंग नहीं करती शायद वो जा चुकी है ।

मैं जब भी कभी किसी काम के लिए बाहर जाती हूँ उस बूढ़ी औरत को हाथ जोड़कर ही घर से बाहर निकलती हूँ ।

(ऐसी ही दरवानी कहानिया पढे यहाँ पर )

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