रविवार को सुबह रवि का मुझे कॉल आया ।
“अरे भाई आ रहे हो न वृद्धाश्रम ?”
“निकल ही रहा हूँ भाई, गाड़ी लेके गेट पर आजा”
मैंने फोन रख दिया । रवि तो वैसे बहुत हरफन मौला आदमी था । जो चीज मन में ठान ली उसे पूरी करके के छोड़ता था ।मैंने उसकी आँखों मे कभी आँसू नहीं देखे । मैं तैयार होकर सोसाइटी की गेट के पास पहुचा । थोड़ी देर में रवि अपनी कार लेके आया ।
“बैठो लाटसाब, हैप्पी फ्रेंडशिप डे भाई”
“सैम टू यू भाई”
“चलो, मेरे दोस्त लोग मेरा इंतज़ार कर रहे होंगे”
मैं गाड़ी में बैठ गया । वो हमेशा वृद्धाश्रम जाता था । वो वहाँ क्या करता है किससे मिलता है ये मुझे भी जानना था । तो इस बार जिद करके मैं भी उसके साथ वृद्धाश्रम चला आया । रास्ते में रवि ने खाने के लिए कुछ मिठाई और कुछ खाने का सामान लिया । वृद्धाश्रम पहुचते ही रवि का जोरदार स्वागत हुआ ।
सभी लोग ७० से आगे की उम्र वाले थे । इतना जवान रवि इन बुड्ढों से दोस्ती कैसे कर सकता है मैं सोच में पड गया । मेरी हैरानी देख कर रवि ने कहा ।
“ज्यादा सोचो मत, चलो इन लोगों से तुम्हारी मुलाकात कराता हूँ”
और फिर एक एक करके सबसे मेरी जान पहचान कराने लगा । उसके हाथ में जो भी मिठाई थी सब को ऑफिस में जमा करके वो एक छोटे से कमरे में मुझे लेकर गया ।
सामने व्हीलचेयर पर एक ७५ के आसपास के उम्र की बूढ़ी महिला बैठी थी ।
“ओए स्वीटहर्ट कैसी हो?”
“हरामी कितने देर लगा दि आने में?”
उसने अपने कपकपाती आवाज में उसे पूछा ।
रवि हसते हसते उसके पास गया घुटनों पर बैठ कर उसको रवि ने कसके गले लगाया । मैं भी उस बूढ़ी औरत को झुककर प्रणाम करने लगा । अपने हाथों से मुझे और रवि को उठाकर वो बोली ।
“ये रवि न बहुत शैतान लड़का है अपने दोस्तों से मेरी पेचन तो करवा”
रवि अपने पैरों पर खड़ा हुआ ।
“ये सरला है मेरी दोस्त है”
“सिर्फ दोस्त?”
उसने नाक फूलकर कहा ।
“नहीं नहीं मेरी सबसे अच्छी दोस्त, मेरी बेस्ट फ्रेंड!”
यह सुनते है उस बेजान आँखों में एक अनॉकहही सी चमक आ गई ।
“ये जो मेरी दोस्त है न सरला बहुत नौटंकी करती है और बहुत demanding भी है लेकिन मैं इसके सारे नखरे सहन करता हूँ क्योंकि इसके मरने के बाद इसकी सारी प्रॉपर्टी मेरे नाम जो होने वाली है”
इतना मुहफट बोलना सुनते ही मुझे शॉक लगा एक बूढ़ी औरत के सामने उसके मरने की बात कौन करता है?
लेकिन उस बूढ़ी महिला पर इसका कोई असर नहीं हुआ । वो हसने लगी ।
“कुछ नहीं मिलेगा तुम्हें मेरी जायदाद से, मेरी मौत पर तुले हो, मुझे डायबिटिस है ये तुझे मालूम है न! फिर भी मेरे लिए ये मिठाई लाया तू?”
मैं ये सब सुन रहा था लेकिन मेरा चेहरा दखकर दोनों हसने लगे ।
फिर वो मुझे अपनी कहानी बताने लगी ।
“मैं सरला, वैसे तो पेशे से टीचर, एक बड़े स्कूल में पढ़ाने का काम करती थी । घर में सिर्फ मेरे पति, बेटा, और मैं रहती थी । पच्चीस साल खुशी से घर गृहस्थी संभाली । और फिर रिटायर हो गयी । मेरे बेटे को कॅनडा में एक बड़ी कंपनी में नोकरी लागि । वो शुरु से जिद कर रहा था की मेरे साथ चलो लेकिन मेरे पति थोड़े पुराने खयालात के थे । यह की मिट्टी को छोड़कर वहाँ के मिट्टी को अपनाना उन्हे गवारा नहीं था ।
बेटा गया और हम अकेले पड़ गए । एकदिन अचानक से उनको छाती में दर्द होने लगा । मैंने पड़ोसी की मदद से उनको अस्पताल भर्ती करवाया लेकिन बहुत देर हो चुकी थी ।
अब मैं अकेले पड़ चुकी थी । लोकडाउन के वजह से मेरे बेटे को अपने पिता के अंतिम संस्कार करने का अधिकार भी गवाना पड़ा । मैं घर में अकेली रहती थी । और अकेला पन मुझे खल रहा था । लॉकडाउन जैसे ही खुला मेरा बेटा मुझे मिलने को आया । मेरे दामन में सर रखकर बहुत रोया । मुझे बोलने लगा अब मैं यही आ जाता हूँ । लेकिन मैंने उसे मना किया । स्कूल में जब मैं टीचर थी तब सबको अपने सपनों की उड़ान भरने की शिक्षा मैंने ही दी थी तो अपने ही बेटे के पंख मैं कैसे कांटती?
उसे मनाकर वापिस भेज दिया बेटे ने मेरी सहूलियत के लिए एक केयर टैकर को हाइर किया । कॅनडा से मुझे हर महीने पैसे भिजवाता था । लेकिन मेरा अकेलापन उससे कहा दूर होने वाला था ?
ऐसे में मेरे पैर जवाब देने लेगे । मैंने उसे जान बूझकर नजर अंदाज किया । इसी वजह से यह व्हील चेयर मेरे नसीब में आयी ।
केयर टैकर को मुझे संभालना मुश्किल हो रहा था । तो बेटे ने मजबूरन मुझे इस वृद्धाश्रम में भर्ती करवाया ।
मैं और उदास रहने लगी । ऐसे में ही यह नालायक रवि मुझे मिला । वो हर वक्त वृद्धाश्रम आता था ।
आते वक्त मिठाई लाता था ।
रवि हमेशा हसमुख ! हजरजबाबी ! दुख दर्द क्या होता है यह शायद उसे मालूम ही नहीं । वृद्धाश्रम में हमारा कोई साथी अगर परलोक सिधार जाए तब भी इसकी आँखों में मैंने काभी पनि की एक बंद नहीं देखि । हमेशा दूसरों को खुश रखना इसका काम था ।
पहली बार जब मुझे ये मिल तब एक मिठाई का टुकड़ा मेरे हाथ में दिया । मैंने कहा मुझे डायबिटिस है । तो बोला और कितने साल जिना चाहती है तू बुढ़िया ! इतना कहकर उसने मेरे मुह में मिठाई भर दी ।
चुप चाप खा लो । उतना ही अच्छा है । ज़िंदगी के कुछ साल और कम हो जाएंगे । ज़िंदगी के कुछ हसीन साल तुमने यू ही बर्बाद कर दिए और अब शोक मनाने से कोई फायदा नहीं ।
उसका यह प्रवचन सुनकर मैं दिनभर हस्ती रही । उसके बाद मानो मेरी पूरी ज़िंदगी ही बदल गयी । सारी उदासी दुख दर्द चले गए । अब ज़िंदगी में सिर्फ खुशिया ही खुशिया है । मैंने ज़िंदगी को अपना लिया है और ये सब इसका कमाल है ।
उसकी कहानी खत्म हुई ।
मैंने कहा ।
“आपने सच कहा सरला जी ये रवि बड़ा मुहफट है । मैंने कभी इसे सिरियस होते देखा”
कुछ वक्त शांति से बीत गया । सरला जी एकाएक बोली ।
“रवि आज फ्रेंडशिप डे है आज के दिन तुम अपने प्यारी दोस्त को एक तोहफा दोगे?”
उस स्तिथि में भी रवि हसा और बोला ।
“इस उम्र में भी तुझे तोहफे की इच्छा है ! बोल तुझे क्या चाहिए ? क्या तेरे लिए तुझे अपने घर ले जाऊ?”
“नहीं नहीं उसकी जरूरत नहीं रवि तुमने मेरे लिए पहले ही बहुत कुछ किया है, मुझे सिर्फ इतना ही चाहिए की जब मैं यह दुनिया छोड़ कर चली जाऊँगी तब मेरा अंतिम संस्कार करोगे? मेरे मरने के बाद कोई मेरे लिए आँसू नहीं बहाएगा यह सोचते ही मैं दहक जाती हूँ तुम मेरे दोस्त हो तुम रोओगे नहीं यह मुझे मालूम है लेकिन इस बूढ़ी दोस्त के लिए क्या मैं तुम्हारे थोड़े आँसू मांग सकती हूँ?”
ऐसी अकल्पित इच्छा सुनते है रवि का दिल दहल उठा । एक पल के लिए उसका चेहरा उदासी से भर गया ।
मैं भी असहज हो गया ।
“बुढ़िया कुछ भी बकती हो!”
ऐसा कहकर उसने सरला जी का हाथ अपने हाथ में लिया कुछ देर ऐसे ही बैठ गया । फिर उठ कर सरला जी से आंखे चुराकर गर्दन झुकाकर वहाँ से जाने लगा ।
ज़िंदगी में पहली बार मैंने रवि के आँख में आँसू देखे ।

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