पागल भिखारी- समाज या आदमी?

यह कहानी है एक पागल भिखारी की !

आज मैं बहुत दिनों बाद मंदिर में दर्शन  के लिए के गया । मंदिर के बाहर भिखारियों का बड़ा सा झुंड भिक्षा के लिए खड़ा था । मैं हर एक भिखारी के कटोरी में पैसे डालने लगा । सबसे नीचे वाली लाइन में एक भिखारी बैठा हुआ था । वो ना ही मेरी तरफ देख रहा था और ना ही उसकी कटोरी में कितना धन जमा हुआ है उसकी तरफ । मैंने उसके भी कटोरी में थोड़े पैसे डाले और पासवाले फूलों के ठेले पर गया । फूल वाले भैया से मैंने पूछा ।

“ये भिखारी इतना शांत क्यू है?

“वो पागल भिखारी है साब”
“मतलब, ?”
“अरे वो किसी के खाना नहीं लेता, थोड़े से पैसे जमा होते ही वहाँ से चला जाता है”
   उसके बाद मैं उस भिखारी का निरीक्षण करने लगा ।   साधारण ६० के आस पास उम्र, गोरा चेहरा। चेहरे पर तेज, वो निसंदेह भिखारी नहीं थे । घुटने के नीचे से एक पैर गायब हो चुका था । उसके पास ही में उसकी लाठी पड़ी हुई थी । शायद किसी एक्सीडेंट में उनकों अपना पैर खोना पड़ा होगा मैंने अंदाज लगाया । मैं खुद एक डॉक्टर था इसीलिए मेरी जिज्ञासा और बढ़ने लगि ।

  मैं उस भिखारी के पास जाने लगा तभी वो फूल वाला भैय्या बोला ।

“साब मत जाओ उसके पास पागल भिखारी है वो”
   मैंने नजरअंदाज किया ।

मैं उस भिखारी के पास गया ।

“बाबा कैसे हो? आपको क्या तकलीफ है?”
“तकलीफ ? कैसे तकलीफ बेटे ! I have no problem but I may have some eye problem in my right eye”
   इतनी अच्छी इंग्लिश सुनतेही मैं चौक गया । मैंने उनके आँखों में देखा । उनसे कहा ।

“बाबा आपको तो मोतीबिन्द का प्रॉब्लेम है”
“अच्छा आप डॉक्टर हो क्या?”
“जी हाँ बाबा”
“well then I had cataract operation in 2000 for my  left eye”
    ये कुछ अलग ही चीज है मैं सोचने लगा ।
“बाबा आप यहाँ क्या कर रहे हो”
“भीख माँगता हु डॉक्टर साब और क्या रोज २ घंटे मैं इधर ही रहता हूँ”
“लेकिन क्यूँ? आप तो मुझे पढेलिखे लगते हो”
“पढे लिखे!!!”
    ऐसा बोलकर वो हसने लगे । मैंने कहा ।

“आप मेरा मजाक उड़ा  रहे हो”

“oh no doc, मेरा वो इरादा नहीं  था, मैं आपसे माफी माँगता हूँ”
“नहीं नहीं आप माफी मत मांगिए”
“हम थोड़ा दूर जाकर बात करते है नहीं तो लोग आपको भी पागल कहेंगे”
  हम दोनों थोड़े दूर वाले एक चाय के टपरी पर आ गए ।

“आप मेरे बारे में जानना चाहते है ना?”
“जी हाँ बाबा”
“well, मैं एक मकैनिकल इंजीनियर हूँ, एक बड़े से कंपनी में काम करता था, एक दिन एक नए ट्रैनी को सीखते हुए मचीं में पैर चला गया । कंपनी ने सारा खर्चा करके ऊपर से क लाख रुपये भी दिए और काम से निकाल दिया”
“फिर तो आपको घर खर्चे  में बहुत दिक्कत आई होगी न?”
“बिल्कुल नहीं, कंपनी ने जो पैसे दिए थे उन पैसों से मैंने एक बड़ा स वर्कशॉप खोला, उसके बाद नया घर ले लिया सब आराम से चल रहा था, बेटा बड़ा हुआ वो भी मकैनिकल इंजीनियर था उसने एक बड़ी सी कंपनी डाली”
“सब अच्छा था तो आपको अभी भीख क्यू माँगनी पड़ रही है”
   मैं जरा से असमंजस में था ।

“बेटे ने कंपनी के लिए कर्जा लिया था, वो चुकाने के लिए  मेरा वर्कशॉप बेचना पड़ा बाद में कंपनी भी बेचनी पड़ी और फिर बेटे ने एक दिन मेरे से किसी कागज पर दस्तखत लिए मुझे बाद में पता चला की उसने ये घर भी बेच दिया है और सारे पैसे लेकर वो लंदन चला गया उधर ही शादी कर ली”
“बाबा लेकिन आपके पास स्किल है आप जो चाहे वो कर सकते हो”
“यही बात मेरी उम्र को और मेरे टूटे हुए टांग को बता दो”
   मुझे ही मेरी बात का बुरा लगने लगा ।

“चिंता मत करो बेटा मेरे बेटे ने मेरा वर्कशॉप बेच दिया था उसी वर्कशॉप में मैं अब काम करता हूँ महीने के १० हजार मिल जाते है”
    मेरे दिमाग में अब सवालों के सैलाब आ चुके थे ।

“लेकिन बाबा फिर आप यहाँ कैसे?”
“मेरे बेटे के जाने के बाद पास ही वाले झोंपड पट्टी मैं रहता हूँ अब १० से ५ तक ड्यूटी करता हूँ, ५ से लेकर ७ तक यहाँ भीख माँगता हूँ मेरे बीवी को परैलिसिस है इसीलिए खाना भी मुझे ही बनाना पड़ता है, घर जाकर तीनों का खाना बनाना पड़ता है”
“बाबा अभी आपने कहा अपके बीवी को परैलिसिस है, घर में आप, आपको बीवी रहते है  फिर तीन लोगों खाना क्यों बनाते हो?”
“मेरे बचपन में मैं अनाथ था तब मेरे एक दोस्त के माँ ने मुझे संभाला मेरी देखभाल की मुझे इंजीनियर बनाया, दो साल पहले मेरे दोस्त का दहनत हो गया ९० साल की बूढ़ी औरत को उसके पोतों ने सम्भलने से इनकार किया अब वो मेरे ही झोपड़ी में रहती है”
   मैं अब सुन्न हो गया । इस बाबा के खुद के इतने हाल है … बीवी को परैलिसिस,  खुद का पैर टूटा हुआ , रहने के लिए थी से छत नहीं जो था उसके बेटे ने बेच दिया और खुद विदेश चला गया । और अब उसके दोस्त के माँ को खुद संभाल रहा है ।

“बाबा एक बात पुछू?”
“हाँ बोलो”
“आपके बेटे आपको रास्ते पे लाकर खड़ा किया आपको काभी गुस्सा नहीं आया?”
“नहीं नहीं डॉक्टर साब मैंने वो सब उसके लिए ही तो कमाया था उसने ले लिया उसमे बुरा क्या है?”
 और फिर जोर जोर से हसने लगे । हसते हसते अपना मुह फेर लिया । शायद उनको अपने आँखों का पानी छिपाना था ।

“१० हजार में सब मैनेज नहीं होता है इसीलिए यहपर भीख मांगते हो ना बाबा”
“नहीं बेटे, १० हजार में सब मैनेज हो जाता है लेकिन जो दोस्त की माँ उसको शुगर है और bp भी वो मैनेज करने में दिक्कत आती है इसलिए यहाँ पर भिखारी बनकर भीख माँगता हूँ”
     मैं उसकी तरफ देखते रह गया । वो आगे कहने लगे ।

“मैं सिर्फ २ घंटे ही मंदिर के बाहर भीख माँगता हूँ, किसी ने खाना दिया तो वो मैं नहीं लेता अगर पैसे मिले तो उसी पैसों से मेडिकल में जाकर माँ के लिए दवाईया लाता  हूँ”
    खुद का लड़का छोड़कर चला गया और ये दूसरे की माँ को संभाल रहा है । मेरे भावना का बांध टूटने ही वाला था आँखों में आया पानी मैंने बड़ी मुश्किल से रोका ।

“बाबा, दूसरे के माँ के लिए आप यहाँ भीख मांगते हो?”
“दूसरे की…..! अरे बेटे मेरे लिए बचपन में उसने बहुत कुछ किया है अब मेरी बारी है”
   न जाने क्यू मुझे मेरी माँ की याद आने लगी थी । वो गाव में थी बड़े भईया के साथ । मैंने उस बड़े दिल वाले भिखारी  से पूछा ।

“बाबा आपके बीवी को पता है क्या आप यहाँ पर भीख मांगते हो?”
“नहीं नहीं, मैंने उन दोनों को बताया है की मुझे एक छोटासा काम मिला है ५ से ७ तक और वैसे भी दोनों झोपड़ी के बाहर नहीं आती । एक को परैलिसिस है और दूसरी इतनी बूढ़ी  है की चल भी नहीं सकती”

   मुझे कुछ सुझा । मैंने उनका हाथ आओने हाथ में लिया और कहा ।

“बाबा आपकी बूढ़ी माँ के लिए हर महीना दवाई का इंतजाम मैं कर दूंगा ताकी आपको यहाँ आकार भिखारी की तरह भीख ना मंगनी पड़े”
“नहीं डॉक्टर मैं आपसे यह एहसान नहीं ले सकता, आपको उसको दवाई दोगे इसका मतलब वो एक भीख ही हुई ना? कोई मुझे भिखारी कहे चलेगा लेकिन उस बेचारी को नहीं”
“बाबा डॉक्टर समझकर नहीं लेकिन अपना बेटा समझकर ही उस बूढ़ी दादी की मदद करने दो”
“अब एक और नाता मुझसे संभाला नहीं जाएगा डॉक्टर, पहले ही एक बेटा छोड़ के चला गया है और अब नाता टूटते देखने की हिम्मत मुझ में नहीं है अब”
   उसके अपना हाथ छुड़वाया ।  अपनी लाठी उठाई मेरे सर पर हाथ रखा और कहा ।

“अपना खयाल रखना बेटे”

 ऐसा बोलकर वो चला भी गया ।

उस पागल बड़े दिल वाले भिखारी को मैंने प्रणाम किया । मेरे हाथ अपने आप जुड़ गए ।

सच में पागल कौन था ये बूढ़ा आदमी या उसे पागल कहने वाला ये समाज?”
भिखारी कौन था ये दिलदार आदमी या फिर उसका बेटा ?
कम से कम मेरे सर पर छत था लेकिन ये पागल भिखारी तो इन सब दुखों के बाद भी  इतना खुश था की मानो उसे कोई गम नहीं ।   

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