ब्रेकअप के बाद आज बहुत दिनों के बाद कॉलेज जा रहा था । मन नहीं था लेकिन मजबूरी थी । असाइनमेंट सबमिट करने थे । और उसी वक्त मुझे वो दिखी । हमारे ब्रेक अप के बाद मैं उसे पहली बार देख रहा था । उसे देखते ही पुराने यादें ताज़ा हो गयी । कैसे हमारा ब्रेकअप हुआ । मुझ पर क्या क्या गुजरी सब याद आने लगा ।
उसका नाम तन्वी था मैं प्यार से उसे तनु बुलाता था ।
तनु के लिए मैं हरबार कॉलेज बंक करता था । खुद के मोबाईल के रिचार्ज से पहले उसका मोबाईल रिचार्ज करता था । उसे भूक लगी तो महंगे होटेल्स में उसे लेकर जाता था । अपने बाइक से हम बहुत जगह घूमने जाते । अचानक उसे मुझ पर शक होने लगा की मैं उसे धोका दे रहा हूँ । मेरी बेस्ट फ्रेंड शिवानी के साथ मेरा चक्कर चल रहा है ऐसा उसे लगने लगा ।
मैंने बहुत कोशिश की तनु को समझाने की लेकिन वो जिद्दी मानने को तैयार नहीं थी । मैंने शिवानी से उसकी बात करवाई । मेरे दोस्त को उसके पास भेजकर उसे मनाने की कोशिश की लेकिन सारी कोशिशे बेकार गयी । तनु ने मुझे ब्लॉक कर दिया और फिर मेरे सारे रास्ते खत्म हो गए ।

मैंने बहुत बार उसके घर के बाहर बाइक से चक्कर भी लगाए लेकिन वो टस से मस ना हुई ।
उसके इसी जिद्दी और शक्की मिजाज से मैं तंग आ गया था लेकिन जब आज उसे इतने दिनों बाद देखा तो मेरे सारे दुख दर्द बाहर आ गए । मैंने उसकी तरफ देखा और उसने ने मेरी तरफ देखा । उसने नजर फेर ली । मैंने जेब में से रुमाल निकाला और आँखों में आए आँसू को पोंछ लिए । उसकी सहेलिया मेरी ही तरफ देखरही थी । मैंने असाइनमेंट सबमिट कर दी और कॉलेज से बाहर जाने लगा ।
कॉलेज गेट में पहुचते ही शिवानी मुझे दिखी । मैं रुक गया । रुमाल फिर से निकाला ।
आँखों को लगाकर मैं शिवानी की तरफ जाने लगा । उसने पूछा ।
“क्या हुआ? तन्वी से मुलाकात हुई क्या?”
मैंने सिर्फ गर्दन घुमाई ।
“तुझे कितनी बार कहा मैंने उसे भूल जाओ, वो भी अब मूव ऑन कर चुकी है”
“इतना आसान है क्या शिवानी?”
मेरे जबान से करुणा की धाराये बह रही थी । एक शिवानी ही थी जो मेरे दुख को समझ सकती थी ।
“चलो हम कॉफी पीते है”
शिवानी मुझे कैन्टीन में लेके गयी ।
कुछ देर शांति से गुजरने के बाद उसने मेरे हाथों पर अपना हाथ रखा ।
“तुम्हें उसे भूलना ही होगा मयंक”
मेरे आँखों से फिर से आँसू गिरने लगे ।
वो कुर्सी दे उठी अपना रुमाल लिया मेरे आँसू पोंछे और बिल देने के लिए जाने लगी ।
मैंने उसका हाथ पकड़ा ।
“प्लीज शिवानी तुम पैसे मत दो, “
“मयंक अरे ,मुझे देने दो पैसे मैं ही तुम्हें कैन्टीन लेके आई थी न ?”
“प्लीज शिवानी, तन्वी ने मुझे हर्ट किया है तुम मत हर्ट करो”
“ठीक है जैसी तुम्हारी मर्जी”
वो कुर्सी पर वापस बैठ गयी । मैंने बिल के पैसे भर दिए ।
“थैंक्स शिवानी, मेरे ब्रेकअप के बाद तुमने मुझे इतना अच्छा संभाल लिया”
“इसे में थैंक्स की क्या बात है, दोस्ती में इतना तो करना बनता है”
“बाय द वे, परसों शनिवार है नई मूवी लगी है सोच रहा हूँ जाके देख आऊ”
“क्यू?”
“थोड़ा दिल संभाल जाएगा, ब्रेकअप के बाद वाले ट्रॉमा से थोड़ा तो बाहर निकलूँगा, तुम आओगी मेरे साथ?”
“अरे लेकिन मैं…….”
“प्लीज ना मत बोलना अभी तुम्हारा ही तो सहारा है”
“ठीक है लेकिन एक शर्त पर, अगर तुम मुझे टिकट के पैसे भरने दोगे तभी आऊँगी”
“ठीक है चलेगा”
“चलो मैं निकलती हूँ”
“ओके, मैं तुम्हें कॉल करता हूँ परसों”
“हाँ बाय”
शिवानी अपना बॅग उठाकर चली गयी ।
मुझे शायद तन्वी का कॉल आ रहा था । लेकिन मैं जान बूझकर अनदेखा कर दिया ।
मैंने अपनी बाइक निकाली । नुक्कड़ के एक टपरी पर आके रुका । टपरी वाले भैया से पानी लेकर अपना मुह धो लिया । एक गोल्ड फ्लेक और एक कटिंग की ऑर्डर दी ।
इतने दूर कॉलेज का कोई नहीं आता अब नाटक करने की कोई जरूरत नहीं थी ।
मैंने सिगरेट जलाई और एक घूंट चाय का लिया ।
अच्छा हुआ ब्रेकअप हुआ ।
वैसे शिवानी भी अच्छी है । try कर सकते है ।
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