The Horror story in Hindi

अंधेरा कायम रहे

   अमावस की रात थी । मैं कंपनी से घर पैदल जा रहा था । घर जाने के लिए मुझे बहुत सारे गलियों से होकर गुजरना पड़ता था । इतना अंधेरा था की मुझे चलने के लिए मोबाईल के टॉर्च की जरूरत पड़ी । मैं इतना डरा हुआ था की मैं हेड्फोन लगाकर गाने सुन रहा था फिर भी मेरे धड़कनों की आवाज मुझे आ रही थी । मैं वो गली पार कर ही रहा था तो अचानक से मुझे पीछे से आवाज आयी ।

“आपको भी डर लग रहा है?”
   मैंने देखा तो एक २०-२२ साल की लड़की मुझ से पूछ रही थी ।

“अरे नहीं तो,! अगर आपको लग डर लग रहा है तो मैं आपके साथ चलता हूँ”
    वो बहुत डरी हुई थी । हम दोनों साथ चलने लगे ।

“क्या आपको भूतों मैं विश्वास है?”
उसने मुझे पुछा । मैं चौक गया । अंदर से मैं भी डरा हुआ था । लेकिन खुद को बहादुर दिखने के लिए मैं हसने लगा ।

“बिल्कुल नहीं, ये भूत चुड़ैल कुछ नहीं होते, सब वहम है”
   उसने कुछ नहीं कहा ।

थोड़ी देर चुप रहने के बाद वो फिर से बोलने लगी । सच है लड़किया कभी चुप नहीं रह सकती ।

“मैंने सुना  है की ये गली मैं एक आदमी की आत्मा रहती है और वो आदमी किसी को जिंदा नहीं छोड़ता जो भी रात को उस गली से गुजरता है”
“कुछ भी!”
   मेरी पैन्ट अब गीली होने वाली थी ।

“लोग तो कुछ  भी कहते है, अगर आँखों से दिखाई दे तभी विश्वास रखना चाहिए”
   वो फिर से शांत हो गयी ।

चलते चलते मैं अपने घर के पास आ गया । मुझे बहुत सुकून मिला ।

“ये देखो आ गया मेरा घर, आप कहे तो मैं आपको छोड़ दु अगर आपको डर लग रहा है तो?”
“जरूरत नहीं, मेरा इलाका यहा से खत्म होता है”
   मैंने पीछे मुड़कर देखा तो वो लड़की ……….वो लड़की गायब हो चुकी थी ।

मैंने सच में पैन्ट गीली कर दी । मैं भागकर घर जाने लगा । तभी पीछे से आवाज आई ।

“अब देख लिया न आँखों से ! अब हो गया न विश्वास ? भूत होते है!!!!!!!!”

  बचपन का प्यार

आज उस दिन  को बीते ३५ साल हो गए । मैं तब स्कूल जाता था । ९ वी कक्षा में था इसलिए जोरों शोरों से पढ़ाई चल रही थी । मेरा स्कूल नदी के उस पार था और मुझे पूल पार करके स्कूल जाना पड़ता था । ऐसे ही एक दिन स्कूल जाते वक्त मैंने देखा ।

एक बेहद सुंदर लड़की सायकल से आ रही थी । मैं पूल के इस पार ही रुक गया । वो अपने ही धुन में थी । लेकिन मेरे लिए सब स्लो मोशन हो रहा था । मैंने इतनी सुंदर लड़की इससे पहले कभी नहीं देखि थी । उसके बाल खुले थे इसलिए सायकल चलाते वक्त उसकी झुलफ़े हवा से ऐसी बाते कर रही थी की मानो ये हवा भी उसकी आशिक है । मैं मंत्रमुग्ध होकर उसे देख रहा था ।

और उसके बाद ये मेरा रूटीन बन गया । वो हर रोज पूल से गुजरती और मैं उसे देखता । न वो कभी मेरे तरफ देखती और ना ही मैं उसे कुछ कहता ।  कभी पूछने की हिम्मत नहीं हुई ।

और एक दिन अचानक से उसका आना बंद हो गया । दोस्तों से पूछा तो उन्होंने पता लगाया की उसका परिवार ये गाव छोड़कर चला गया है ।

मैं निराश हो गया । मुझे हर दिन उसकी याद आती थी लेकिन पढ़ाई भी करनी थी ।

कुछ सालों बाद मैंने गाव छोड़ दिया शहर में मुझे बड़ी अच्छी नोकरी लगी थी । फिर भी मैं उसे भूल नहीं था । मैंने बहुत जगह पर छान बिन की । बहुत दोस्तों को काल लगाया लेकिन किसी को उसके बारे में पता नहीं था । और एक दिन मेरे दोस्त आशु का मुझे काल आया ।

“भाई वो लड़की तो गुजर चुकी है”
   चारों और सन्नाटा छा गया . आशु आगे कह रहा था ।

“उसके पास सीखने के लिए पैसे नहीं थे, उनकी स्तिथि बहुत खराब थी, और कर्जा भी बहुत हो गया था  इसीलिए तंग आकर उसके बाप ने सब परिवार को मार डाला और खुद आत्महत्या कर ली”
   मैंने फोन रख दिया । मेरी आंखे नम थी ।

मैं अपने दुख को व्यक्त नहीं कर सकता था । थोड़े दिनों बाद मेरे पिताजी ने मेरे लिए रिश्ता भेजा । मैंने तुरंत हा कर दी । मुझे अकेले नहीं रहना था ।

मेरी धर्म पत्नी एकदम सुशील और सु स्वभावी थी । उसने मुझ पर प्यार की बारिश कर दी ।

धीरे धीरे उस सायकल वाली लड़की की यादें धुंदली हो गयी ।

सब ठीक चल रहा था ।

अब उस दिन को ३५ साल बित गए । मुझे तो उसका नाम भी मालूम नहीं था ।

शायद मैं उसे भूल गया ।

एक दिन सुबह मुझे आशु का कॉल आया ।

“हैलो, क्या भाई आशु इतने दिनों बाद कैसे याद आई?”
“सुधीर तुझे याद है वो सायकल वाली लड़की?”
   मैं कुर्सी से उठ गया ।

“क्या हुआ आशु?”
“वो जिंदा है सुधीर, मैंने कल ही उसे अपने गाव में देखा”
“क्या बात कर रहे हो? तुमने तो …..”
“उस वक्त मुझे गलत फहमी हुई थी मुझे माफ कर दे यार”
   उसने फोन रख दिया । मैं फौरन गाव जाने को निकला । मैंने गाड़ी निकाली । मेरी पत्नी मुझे पुकार रही थी लेकिन मानो मुझे कुछ सुनाई नहीं दे रहा था । मैंने गाड़ी का स्पीड बढ़ाया ।

कुछ घंटों बाद जब मैं गाव पहुच शाम हो चुकी थी । मैं अपने पुराने घर को देखा वहा अभी भी मेरे बचपन की यादें बसी हुई थी । मैं उस पूल की पास आया और मेरी सब यादें ताज़ा हो गयी ।

   रात के ११ बज चुके थे । मेरे व्हाट्सप्प  के ग्रुप पे मुझे एक मेसेज आया ।

हमारे परम मित्र श्री आशु जी का आज सुबह ही दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो गयी भगवान उनकी आत्मा को शांति दे ।

ये पढ़ते ही मैं शॉक हो गया आज सुबह ही मुझे आशु ने कॉल किया था तो फिर उसकी मूत कैसे हुई ?”
मैं सोच ही रहा था तभी पूल के उस पार से कुछ आवाज आयी । वो सायकल की आवाज थी ।  

बहुत अंधेरा था इसलिए मुझे कुछ स्पष्ट नहीं दिख रहा था ।

वो वही थी !

पुरानी सायकल !
बाल खुले हुए!

धीरे धीरे मेरे पास आती हुई!

स्लो मोशन में!

इस बार वो मेरे ही तरफ देख रही थी !

रात का सन्नाटा चीरते हुए मेरा दिल जोर जोर से धडक रहा था !

वो और पास आ रही थी !

“क्या तुम मेरे लिए आए?”
   मैं कुछ बोल न सका । मैंने सिर्फ गर्दन घुमाई ।

  वो मुस्कुरायी ।

“कितनी देर लगा दी आने में?”
     इसका मतलब वो भी मुझ से प्यार करती थी । मैं खुशी से फुले ही नहीं समा रहा था ।

“मुझे माफ कर दो”
    मैं सिर्फ इतना ही कह सका ।

“चलो, मेरे साथ”
  उसने मेरा हाथ पकड़ा । मेरे शरीर में जैसे बिजलियाँ तैरने लगी । मैंने जब उसे  पहली बार देखा था तब भी उसने यही ड्रेस पहनी थी । मुझे अचंबा इस बात का था के इतने सालों बाद भी उसकी उम्र क्यों नहीं बढ़ी?

“मैंने कहा चलो मेरे साथ!”
   उसकी मोहिनी मेरे दिमाग पर इतनी हावी थी के मैं उसके पीछे पीछे चलता रहा । और उसने उस पूल के ऊपर से छलांग लगा दी । और उसके बाद मैंने भी ………………..

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