unique love story- एक अनोखी प्रेम कहानी

       आज बहुत सालों के बाद  समीर अपने गाव जा रहा था । उसकी कार फूल स्पीड से चल रही थी । लेकिन समीर बहुत बैचेन था । ना जाने क्यू लेकिन दिल की गहराईयों में एक पुरानी जख्म फिर से ताज़ा हो रही थी । क्यू आज भी मन मानने को तैयार नहीं था । इस सवाल का जवाब उस के पास नहीं था ।

     उसके ७ साल का बेटा राहुल   बहुत खुश था । अपने ज़िंदगी में  वो पहली बार गाव जा रहा था । उसके लिए तो ये सब नया नया था । पीछे वाली सीट पर समीर की पत्नी  शालिनी मैगजीन पढ़ने व्यस्त थी ।

 दोपहर के २ बजे होंगे अब वो उनके गाव के नजदीक पहुचे थे । गाव की ओर इशारा कर के समीर ने अपने बेटे से कहा ।

“बेटा, वो देखा अपना गाव!”
 “ओह. ! हाउ ब्यूटीफूल पापा!”

    राहुल अब सीट पर खड़े होकर कूदने लगा । वो देखकर शालिनी चिल्लायी ।

“ये क्या तरीका है राहुल? Behave थोड़ी देर में हम पहुचने वाले है न!”
   ये सुनकर राहुल उदास हो गया । वो चुप चाप बैठ गया ।

और इतने में ही उसकी नजर गाड़ी के खिड़की से नीचे गई । वो फिर से उल्हासीत हुआ ।

“वा पापा आपने बताया नहीं, के अपने गाव में डैम  भी है ?”
    रास्ते के नीचे वाली बाजू में एक मिट्टी का डैम था । वो बांध अंग्रेजों के जमाने का था लेकिन फिर भी मजबूत और विशाल था ।

“बहुत मजा आएगा पापा, हम यहाँ स्विमिंग करने आएंगे न?”
   समीर ने ये बात सुन कर भी अनसुनी कर दी । राहुल अब हठ करने वाला था । लेकिन अपनी माँ का गुस्सा देखकर वो शांत था ।

समीर ने चुपके से उस डैम पर अपनी नाजे घुमाई और उनकी यादों से उसके शरीर के रोंगटे खड़े हो गए ।

फिर वहाँ से नजर और दिमाग हटाके वो चुपचाप गाड़ी चलाने लगा ।  

आखिरकार वो गाव पहुच गए ।

बहुत सालों बाद समीर अपने गाव को देख रहा था । लगबग ९ साल पहले वो काम के सिलसिले से  कॅनडा  चला गया था । लेकिन उसकी बाद वो पहली बार यहाँ आया था ।

इतने सालों बाद आने वाले समीर का बहुत जंगी स्वागत हुआ । उसके माता पिता तो अपने पोते के देखकर इतने खुश हुए की जैसे समीर का बचपन लौट आया हो । छोटे राहुल को उनके दादा जी ने तो गोद में उठा लिया था और जमीन पर रखने का नाम ही नहीं ले रहे थे । इस स्वागत से राहुल तो सहम गया क्योंकी उसके लिए ये सब नई बात थी । पहले कुछ देर तो वो बहुत खेल लेकिन धीरे धीरे बोअर होने लगा । अब वो अपने पापा से जिद करने लगा ।

“पापा चलो ना, मुझे डैम देखना है “
“बेटे अभी शाम होने वाली है और ये स्विमिंग का टाइम नहीं है”

   समीर और बैचेन हो रहा था ।

“नहीं पापा मुझे अभी जाना है”
    राहुल अब जोर जोर से पैर पटकने लगा ।

“हम कल सुबह पक्का जाएंगे, प्रोमिस”
   लेकिन  राहुल सुनने को तैयार नहीं था । पापा मेरी बात नहीं मान रहे है ये देखकर उसने अपना सबसे पावरफूल हथियार निकाल । अब जोर जोर से रोने लगा । उसके जिद को तंग आकार शालिनी ने समीर से कहा ।

“अरे समीर इतनी जिद कर रहा है तो उसे लेकर जाओ, थोड़ा चलेगा तो जल्दी थक जाएगा “
     समीर को उसका कहना जायज लग रहा था । बेटे के पैर चलते चलते दुखेंगे और कुछ समय के बाद ठीक भी होंगे लेकिन दिल की जख्म का क्या करू? ९ साल से चलते चलते इतनी दूर आया हूँ की अब पीछे देखता हूँ तो मेरी परछाई भी मुझ से दूर भागती है । इतने सालों से दिल की गहराईयों में कुछ राज दफन करने की कोशिश कर रहा हूँ लेकिन मुझ से अभी भी मेरे अतीत का दामन नहीं छूट रहा ।

खयालों में खोए हुए समीर का कंधा हिलाते हुए राहुल ने कहा ।

“चलो न पापा प्लीज!”
 आखिरकार अपने मर्जी के खिलाफ वो वहाँ जाने को तैयार हो गया जहा जाने के बारे में वो सपने में भी नहीं सोच सकता था ।

छोटी छोटी गलियों से गुजरकर, चौक से होकर  फिर पुराने कच्ची सड़क से डैम का रास्ता बनाता था ।

राहुल ने समीर का हाथ पकडा था । लेकिन जब चौक आया तब समीर के कंधे पर पीछे किसी ने हाथ रखा । समीर ने पीछे मुड़कर देखा । वो नितीन था । समीर का क्लासमेट । अपने बचपन के दोस्त को देखकर समीर बहुत खुश हुआ । नितीन ने समीर को एकदम कसके गले लगाया । ठीक ९ साल पहले कॅनडा जाने से पहले नितीन ने ऐसे ही उसे गले लगाया था ।

“कैसे हो मेरे भाई?”
“जी… अब तक तो सब ठीक ही है, नितीन तुम कैसे हो?”
“सब बढ़िया, कॅनडा से कब आए तुम?”
“अभी आधे घंटे पहले आया हूँ”

“तो मुझे कब बताने वाले थे ? या फिर मुझे बताना ही नहीं था?”
“वैसी बात नहीं है नितीन, … “
“चलो छोड़ो, जाने दो, आज शाम को घर आ जाना, भाभी और राहुल को लेकर”
“अरे जरूर आऊँगा”
“अभी पैदल कहा जा रहे हो?”
“अरे राहुल जिद कर रहा है, उसे डैम देखना है”
   यह सुनतेही नितीन का चेहरा गंभीर हो गया ।

“वहाँ ज्यादा देर तक मत रुकना, अभी सूरज ढलने को है, जल्दी वापस आना”
“ठीक है”
   समीर इतना ही कह सका।  नितीन ने उसे फिर एक बार गले लगाया ।

“शाम को मिलते है”
यह कहकर नितीन वहाँ से चला गया ।

शाम के ७ बज चुके थे । धीरे धीरे अंधेरा बढ़ने लगा था । राहुल के लिए ये सब माहौल एकदम नया था और उसे वह पसंद भी आ रहा था । उसने अपने पापा से मोबाईल लिया और नजारे के फोटो लेने लगा । लेकिन समीर तो अलग ही खयालों में खोया हुआ था ।

उस अंधेरे में कुछ ढूंढ रहा था ।

उस अंधेरे में भी उसे कुछ दिखा ।

कई ये वही चमेली का पेड़ तो नहीं? हाँ ये वही चमेली का पेड़ है ।  और ९ साल पुराना वो लम्हा उसकी आँखों की सामने मूवी के तरह तैरने लगा ।

 ९ साल पहले

समीर उस वक्त अपने गाव से दूर शहर में इंजीनियरिंग के अंतिम वर्ष में था । आज उसका आखरी पेपर था, जैसे ही वो एक्जाम के सेंटर से बाहर आया, उसने मोबाईल चालू कर दिया ।

मोबाईल ऑन करते  ही उसके दोस्त नितीन का कॉल आया ।

“समीर अभी के अभी गाव आ जा “
“क्या हुआ सब ठीक?”
“तू जल्दी आ, सब बताता हूँ”
  यह कहकर नितीन ने कॉल कट कर दिया ।

   समीर ने बिना सोच विचार किया वैसे ही गाव जाने के लिए निकल पड़ा ।

गाव जाने के लिए उसे तुरंत बस मिल गई । बस में बैठते ही उसके खयालों का सिलसिला फिर से चालू हो गया ।

नितीन ने कॉल किया मतलब बहुत बड़ा मामला हो सकता है, पिछले हफ्ते  नितीन बात रहा था की उसके पिताजी की तबीयत ठीक नहीं है,

कही चाचा जी कुछ हुआ तो नहीं?

नहीं।! मुझे ऐसा नहीं सोचना चाहिए, जब गाव पोहोचुँगा तब सब पता लग जाएगा ।

अगले ५ घंटे बड़े मुश्किल से समीर ने उस बस में निकाले ।

बस स्टैन्ड पहुचते ही वो भागते भागते नितीन से मिलने को जाने लगा ।

शाम के ७  बज चूक थे और जो की बस स्टैन्ड गाव से २ किलोमीटर दूर था उसे पैदल ही जाना पड़ा ।

अंधेरा बढ़ रहा था लेकिन समीर को उसकी फिक्र नहीं थी । अब वो उसी डैम के पास पहुँचा था । उसी रास्ते से होकर समीर को गाव पहुँचना था । वही पर बगल में एक चमेली का  बड़ा स पेड़ था । उसी पेड़ के नीचे कोई लड़की रो रही थी ।

“इतने रात को कोन हो सकता है?”
   समीर खुद से ही बातें कर रहा था । उसने हिम्मत करके आवाज दिया

“कौन है वहाँ?”
   लेकिन उधर से कोई जवाब नहीं आया । समीर पूरी हिम्मत  जुटाके उस पेड़ के पास गया ।

“मैंने पूछा कौन है वहाँ?”
इतने में ही अचानक से वो लड़की समीर के पास आई और उसे कसके गले लगाया ।

समीर हैरान हुआ । वो स्पर्श कुछ जाना पहचाना सा था ।

“पूजा तुम? यहाँ क्या कर रही हो?”
   लेकिन पूजा सिर्फ रो रही थी ।

“पागल हो क्या? मेरे सवाल का जवाब दो!”
   वो पूजा थी । समीर की गर्लफ्रेंड । पिछले ४ साल से वो एक दूसरे से प्यार कर रहे थे ।

पूजा ने रोना बंद कर दिया और बोलने लगी ।

“कहा थे तुम समीर, मैंने तुम्हें कितने कॉल किए, मुझे यहाँ से लेके चलो समीर”
“लेकिन हुआ क्या है पूजा”
“मुझे नहीं रहना यहाँ, मेरे घरवालों को हमारे बारे में पता चल गया समीर, उन्होंने मुझे बहुत मारा, और बोल रहे थे तुम्हें भी नहीं छोड़ेंगे, मुझे उनकी ये बात पसंद नहीं आयी । और फिर मैं यहाँ चली आयी”
    समीर को इस बात का अंदाजा था । उसने नितीन को कॉल करने के लिए अपना मोबाईल लिया लेकिन मोबाईल की बैटरी खतम हो चुकी थी ।

“हम एक काम करते है, गाव चलते है जो होगा देखा जाएगा”
    और फिर दोनों गाव की ओर चलने लगे । पूजा उसका हाथ पकड़कर चल रही थी । लेकिन वो फिर भी रो रही थी । गाव की इलेक्ट्रिसिटी बंद थी इसीलिए सभी जगह अंधेरा था । गाव पास आते ही पूजा ने उसका हाथ छुड़ा लिया ।

“डरो मत पूजा, मैं तुम्हारे साथ हूँ कोई कुछ नहीं बोलेगा”
   चौक में आते ही समीर को किसी ने आवाज लगाया ।

“अरे ये तो नितीन का आवाज है”

“हाँ समीर मैं ही हूँ नितीन”
     इतना कहकर नितीन ने समीर को गले से लगाया और जोर से रोने लगा ।

“समीर मुझे माफ करना अपनी पूजा गयी रे ! तेरी पूजा …….! मुझे माफ करना भाई”
मैं उसे बचा नहीं पाया”
    और फिर से जोर जोर से रोने लगा ।

 थोड़े पल के लिए समीर असमंजस में था ।

“भाई नितीन, तु पागल हो गया क्या?, अरे ये देख मैं पूजा को लेकर आया हूँ, वो मेरी राह देख रही थी डैम पर”
   ऐसा बोलकर समीर पीछे मुड़कर देखा । घनघोर अंधेरे की सिवाय वहाँ कुछ नहीं था ।

“पूजा………. किधर हो तुम? देखो इस समय ऐसा मजाक करना अच्छि बात नहीं”
        और उस अंधेरे में पागलों की तरह समीर को भागते देख नितीन ने उसे पकड लिया और फिर से रोने लगा ।

समीर सुन्न हो गया और उधर ही जमीन पे बैठ गया ।

“समीर आज दोपहर को उसके घरवालों को तुम्हारे बारे में पता चला, पूजा के बाप और भाई ने तो उसे जानवरों की तरह मारा, लेकिन फिर भी वो पागल लड़की तुम्हारा ही नाम ले रही थी, बोल रही थी मुझे मार दो लेकिन शादी करूंगी तो सिर्फ समीर से, उसके बाद उन हैवानों ने उसे धमकी देना शुरू कर दिया अपनी जिद छोड़ दो नहीं तो  हम समीर को जान से मार देंगे, ये बात सुनकर तेरी पूजा डर गयी उसे ये सहन नहीं हुआ और शाम को ६ बजे के आसपास चुपके से गयी वो डैम पर और ……… कूद गयी वो पानी में, उसे वहाँ कूदते हुए किसी ट्रक ड्राइवर ने देख लिया । उसने फौरन लोगों को बुलाया और उसे बाहर निकाला, लेकिन तब तक बहुत देर हो गयी थी समीर”
 समीर एकदम चुप था । मानो उसे कुछ सुनाई नहीं दे रहा था । नितीन आगे कहने लगा ।

“उसकी लाश को गाव लाया गया, मैं उन दरिंदों को पाव पड़ा उनसे मिन्नते की समीर को आने दो उसके बाद अंतिम संस्कार करो लेकिन वो नहीं मानें, मुझे माफ कर देना दोस्त मुझे माफ कर देना”
    नितीन हाथ जोड़कर उसे कह  रहा था ।

     लगबग ८ बज गए होंगे । समीर अपने अतीत में ही खोया था । वो भूल चुका  था की अब उस चीज को ९ साल बीत  चुके है । 

लेकिन  अचानक से राहुल के चिल्लाने से समीर अपने  खयालों से बाहर आया ।

“पापा………….!, “
     राहुल के पैर में बड़ा सा  कांटा चुभा था, इसीलिए वो चिल्ला रहा था ।

“हिलना मत “
   समीर ने उसका पीस अपने हाथ में लिया और हल्के से कांटा निकाल दिया ।

    ‘चलो बेटा अब बहुत देर हो चुकी है अब घर चलते है
“रुको ना थोड़ी देर पापा, ये नजारा कितना मस्त है”
     ‘बेटे इसी नजारे के वजह से मेरा सब कुछ लूट चुका है’  समीर ने मन ही मन में कहा ।

“पापा मैं थोड़े और फोंटो लेता हूँ कॅनडा में जाएंगे तो मेरे दोस्तों को दिखाऊँगा”
    इतना बोलकर वो फिर से फोटो खिचने में बीजी हो गया ।

समीर थोड़ा दूर उस चमेली के पेड़ के नीचे आकार बैठ गया ।

अचानक से उसे  अंधेरे में से कोई दिखने लगा ।

“पूजा……?”
“हाँ मैं ही हूँ तुम्हारी पूजा!,  ९ साल लगा दिए मिलने के लिए लेकिन आखिरकार मिल ही गए, कैसे हो?”
“जिंदा हूँ”
     समीरने  ये बोला तभी पूजा ने उसका हाथ पकड़ लिया ।

“तुम्हें यही चाहिए न की मैं यहाँ से मुक्त हो जाऊ?”
   वही मधुर आवाज, वही आँखों मासूमियत ।

“हाँ. लेकिन ऐसा क्यों पूछ रही हो?”
“तो फिर मेरे लिए एक काम करोगे?”
“बोलो ना जरूर करूंगा”
“मुझे भूल जाओ समीर, ज़िंदगी में आगे बढ़ो, मैं तुम्हें ऐसे उदास नहीं देख सकती, तुम खुश हूँ ये देखकर ही मैं यहाँ से जा सकती हूँ”
   समीर कुछ नहीं बोला । वो नीचे देखने लगा ।

“मेरी तरफ देखो समीर, मुझे पता है हमारी आखरी मुलाकात नहीं हुई और न ही कभी होगी,मेरे लिए इतना तो कर सकते हो न मेरी जान, मेरे लिए मुझे भूल जाओ’

   बड़े निश्चय से समीर ने उसकी आँखों में देखा और कहा ।

“ठीक है पूजा, तुम्हारे लिए इतना कर सकता हूँ लेकिन मेरी भी एक इच्छा है क्या तुम पूरी करोगी?
“बोलो मेरे समीर, मैं अब तुम्हारे लिए क्या कर सकती हूँ?”
“मुझ से वादा करो, मैं जब भी ये दुनिया छोड़ जाऊंगा, हम मिलंगे, हमेशा हमेशा के लिए”
“मैं वादा करती हूँ,हम फिर से मिलंगे, हमेशा के लिए ,  समीर लेकिन अभी मुझे जाना होगा अपना खयाल रखना”
          और वो चली गयी । समीर ने अपने आखों से गिरते आँसू को पोंछ लिया । पूजा के आखरी मुलाकात ने उसे जिंदगी  नये सिरे से जीने के लिए ताकद दे दी ।   राहुल को लेकर वो गाव की ओर जाने लगा ।

हर प्रेम कहानी अनोखी होती है । every love story is unique । और उसे अनोखा बनाता है अटूट प्यार !

प्यार ऐसा ही होता मजबूत और न टूटने वाला ! कमजोरी प्यार की निशानी हो नहीं सकती … ! जो इंसान को अटल, मजबूत बनाता है वही प्यार होता है ……..!
   
  
   

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