planchette
लक्ष्मी अपार्टमेंट में शर्मा परिवार बड़े खुशी से रहता था । इस परिवार की दो लाड़ली बेटियाँ थी, प्रीति और नेहा । प्रीति २० साल की कॉलेज युवती थी तो नेहा प्रीति से २ साल छोटी स्कूल जाती थी । आज शर्मा जी और उनकी पत्नी किसी फ़ंक्शन के लिए बाहर गए थे इसीलिए घर पर सिर्फ दोनों बहने ही थी । उन्होंने आज हॉरर मूवी देखने का प्लान बनाया । और जैसे की तय हुआ था उन्होंने हॉलिवुड हॉरर मूवी देखना शुरू किया । नेहा ने डर डर के मूवी देखा तो उसे देखकर प्रीति को हसी आ रही थी ।
“कितना डरती हो डरपोक! भूत, चुड़ैल ऐसा कुछ नहीं होता”
प्रीति उसे समझा रही थी ।
“ये सब बोलना आसान है तुम्हें क्या पता मेरी क्या हालत हो गई थी !”
नेहा अभी भी डर के मारे कांप रही थी । प्रीति को उसका मजाक उड़ाने की इच्छा हुई ।
“चलो हम एक काम करते है, ममी पापा को अभी बहुत समय है तो हम प्लॅनचेट करते है”
“ये प्लॅनचेट क्या होता है?”
“अरे प्लॅनचेट एक यंत्र होता है जिससे हम आत्मा को बुला सकते है”
“अरे नहीं नहीं ! मुझे इन सबमे मत घसीटो मैं इसमे तुम्हारा साथ नहीं देने वाली”
नेहा को पहले से बहुत डर लग रहा था ।
“ठीक है तो फिर मैं मम्मी को तुम्हारे और निखिल के बारे में सब बता देती हूँ”
प्रीति अब उसे ब्लैकमेल कर रही थी ।
“अरे दीदी प्लीज न ऐसा मत करो, ठीक है हम करेंगे प्लॅनचेट लेकिन हम आत्मा को कैसे बुलाएंगे हमारे पास तो प्लॅनचेट बोर्ड नहीं है”
“उसकी चिंता मत करो, मेरे पास बोर्ड है हमने कॉलेज में बनवाया था’
ऐसा बोलकर उसने कॉलेज बॅग से एक लकड़ी का बोर्ड निकाला । वो बोर्ड बहुत ही युनीक था । ऊपर कोने में चाँद और सूरज का चिन्ह बनाया था । और उस चिन्ह के नीचे एक से लेकर नौ तक अंक लिखे हुए था । उसी के नीचे
Yes और no लिखा हुआ था ।
प्रीति ने पूरा सेटअप कर लिया था । उसने उस बोर्ड के चारों तरफ मोमबत्तियाँ जला कर रख दी । और पर्स में से एक सिक्का निकाल कर नेहा से पूछा ।
“बोल किस को बुलाना है?”
“देखो दीदी मुझे अभि भी ये सब ठीक नहीं लग रहा, अभी भी वक्त है मत करो ये प्लॅनचेट”
“तुम कितनी डरपोक हो!” रुको मैं कुकहसोच रही हूँ, किसे बुलाऊ… ?अरे हाँ वो जो सायको किलर शंकर है न उसे बुलाते है”
“क्या… ! तुम्हें पता है न उसने क्या किया है ? उसने १२ जवान लड़कियों की जान ले ली है इसीलिए उसे फांसी दे दी थी अगर वो सच में आया न तो वाट लग जाएगी”
प्रीति ने उसकी तरफ ध्यान नहीं दिया । उसने वो सिक्का बोर्ड पर रखा और कुछ मंत्रों का जाप करने लगी थोड़ी देर बाद
“शंकर की आत्मा जहा कही भी हम तुम्हें बुला रहा है,हमे पता है फांसी के बाद तुम्हें मुक्ति नहीं मिली है, हमारे पास आओ और हमसे बात करो”
जैसा ही प्रीति ने ऐसा कहा । जोर से हवा चलने लगी । सिक्का धीरे धीरे हिलने लगा ।
“दीदी मुझे बहुत डर लग रहा है बंद कर दो ये सब”
“तुम… तुम डरो मत मैं हूँ ना”
प्रीति ने उससे कहा ।
‘कहा हो तुम शंकर ? क्या तुम यहाँ आ गए हो ?”
वैसे ही एओ सिक्का yes वाले चिन्ह पर जाकर रुका। ये देखते ही नेहा जोर से चिल्लाई ।
और ये देख प्रीति जोर जोर से हसने लगी ।
“अरे पागल मैं मजाक कर रही थी ।
और फिर प्रीति ने उसे उस लकड़ी के बोर्ड के नीचे छिपा हुआ मॅग्नेट दिखाया जिसकी वजह से सिक्का हिल रहा था । और फिर से हसने लगी ।
“कोई नहीं है मैं तुम्हें दराने के लिए ये सब कर रही थी”
“ये क्या पागलपन है दीदी ?
ऐसा बोलकर गुस्से से नेहा अपने रूम में चली गयी । उसने जोर से दरवाजा बंद कर दिया ।
“दरवाजा खोलो नेहा, मैं अब मजाक नहीं करूंगी”
लेकिन नेहा बहुत गुस्से में थी ।
“ठीक है मत खोलो जब अकेले डर लगेगा न तब मत आना मेरे पास”
बोलकर प्रीति अपने रूम में चली गयी । कुछ देर के खामोशी के बाद नेहा के रूम से जोर जोर से चिल्लाने की आवाज आने लगी ।
“दीदी बचाओ ये….. आदमी….मुझे मार डालेगा”
प्रीति ये आवाज सुनकर जल्दी से भागकर नेहा के रूम के पास चली गयी ।
“क्या हुआ नेहा….. दरवाजा खोलो नेहा”
प्रीति जोर जोर से दरवाजा खटखटाने लगी ।
और फिर नेहा का आवाज बंद हो गया । प्रीति अभी भी दरवाजे पर धक्के मार रही थी । अचानक से दरवाजा खुल गया । आगे अंधेरा था उसके लाइट ऑन किया और देखा की नेहा जमीन पर गिरी हुई है । उसकी आंखे बंद थी ।
“नेहा उठो क्या हुआ …..मुझे माफ कर दो नेहा प्लीज उठो मैं मम्मी पापा को क्या जवाब दूँगी ?”
ऐसा बोलकर वो रोने लगी ।
“मुझे माफ कर दो नेहा, मैं ऐसा मजाक फिर कभी नहीं करूंगी”
“सच में?”
नेहा ने एक आँख खोलकर पूछा ।
“कुत्ती कमिनी … ! अपने दीदी से ऐसा मजाक?”
“सॉरी दीदी, तुम भी मुझे डरा रही थी ना तो मजिने भी बदला ले लिया”
अब दोनों हसने लगी ।
“चलो मैं वो प्लॅनचेट बोर्ड हटा देती हूँ नहीं तो तुम मुझे फिर से डरा दोगी”
नेहा वो बोर्ड उठाने के लिए उठी ।
“दीदी ये चाकू किसने रखा इधर?”
“कौन सा चाकू?”
देखने के लिए प्रीति नीचे झुकी इतने में ही नेहा ने वो चाकू उठाया आउए प्रीति के गर्दन पर घूमा दिया ।

प्रीति उसकी तरफ आश्चर्य से देखने लगी नेहा अब जोर जोर से हस रही थी ।
अपनी गर्दन मैं से बहते खून को हाथ से दबाके प्रीति ने पूछा ।
“क्यों?”
“तुमने ही तो मुझे बुलाया था’
“तुम… तुम… ?”
“सायको शंकर … !”
और फिर नेहा ने वो चाकू अपने गर्दन पर लगाया । अपने दीदी की ओर देखा और बोली
“मैंने कहा था न दीदी अगर वो सच में आ गया तो … “
और फिर उसने वो चाकू गर्दन पर घूमा दिया ।
दोनों बहने अब हमेशा के लिए सो चुकी थी ।
उस प्लॅनचेट के बोर्ड के पीछे खून से कुछ लिखा था ।
सायको शंकर इज बॅक
