केशव फॉरेस्ट डिपार्ट्मन्ट मे ऑफिसर था । वन मण्डल की तरफ से बहुत बढ़िया सा बंगला उसे रहने के लिए मिला । बंगले में सिर्फ वो अकेला रहता था । माँ बाप गुजर चुके थे । और शादी भी नहीं हुई थी । शुरुवात के दिनों में वो बाहर की मेस से खाना मंगवाया करता था । और फिर उसकी मुलाकात रेशमा से हुई । रेशम विधवा औरत थी जवान थी लेकिन पति का कार एक्सीडेंट में देहांत हुआ था तो घर खर्चे के लिए उसे बाहर के घरों में नौकरानी का काम करना पड़ता था । पोंछा लगाना । बर्तन धोना ये सब वो काम करती थी ।
लेकिन केशव के घर का काम मिलने के बाद उसने सभी घरों के काम बंद कर दिए । अब केशव को बाहर से खाना मंगवाने की भी जरूरत नहीं थी । रेशमा अब सब काम करती थी । झाड़ू पोंछा लगाना । बर्तन माँजना । खाना बनाना । इन सब में दोनों के बीच शारीरिक संबध कब बन गए । दोनों को पता नहीं चला । जरूरत तो दोनों को थी । कुछ महीने अच्छे से बीत गए लेकिन उसके बाद रेशमा उसपर हक जताने लगी । किसी लड़की ने केशव से बात करना भी उसे अच्छा नहीं लगता था । केशव को ये सब मंजूर नहीं था । लेकिन रेशमा का हठ बढ़ने लगा । रेशमा का अनुरोध था की शादी मत करो लेकिन कम से कम उसके साथ हमेशा ऐसे ही रहो । केशव को बंदिशे पसंद नहीं थी । काभी न काभी उसकी शादी होने वाली थी । तब उसके होने वाली बीवी को क्या जवाब देता । वो बोला पैसे ले लो, लेकिन मेरा पीछा छोड़ दो,
मामला बढ़ता गया । उस दिन उनका बहुत बड़ा झगड़ा हुआ । आखिरकार केशव ने रेशमा को काम से निकल दिया । वो भी गुस्से में लाल होकर चली गई ।
कुछ दिन बीत गए । केशव को पता चला की रेशमा ने आत्महत्या कर ली। उसे बुरा लगा । लेकिन बला टली ये सोचकर उसे अच्छा महसूस हुआ । उस रात वो शांति से सो गया । लेकिन उसी रात
किसी आवाज से उसकी नींद खुल गयी ।

खर्… खर्….
वो बिस्तर से उठा । लाइट लगाई लेकिन शायद बिजली बंद थी इसलिए अंधेरे मैं उसे उठना पड़ा । उस आवाज की ओर जाने लगा । उसके घर के पीछे उसका गुसलखाना था । वह पर कोई तो बर्तन धो रहा था । वो रेशमा ही थी । डर के मारे केशव थर थर कापने लगा । रेशमा मुस्कुरायी । उस चाँदनी रात में भी बड़े बड़े नाखून और खून से रंगे दांत दिख रहे थे ।
A short horror story in hindi

दीपक तो बचपन से ही साहसी था । किसी चीज से न डरने वाला, भूतों पर उसे विश्वास नहीं था ।
एक दिन उसने अपने दोस्तों से शर्त लगाई । अमावस के दिन रात को १२ से लेकर १ बजे तक कब्रस्तान में बिताना है । और उसके बदले उसे दस हजार रुपये मिलने वाले थे ।
जैसे की तय हुआ था, अमावस के दिन १२ बजे उसके दोस्तों ने उसे कब्रस्तान में छोड़ दिया और वहा से चले गए । दीपक ने चारों और अपनी नजर डाली । सब जगह एक अनोखा सा सन्नाटा था । कुत्ते उसे देख कर भौक रहे थे । दीपक ने पैर के नीचे से एक पत्थर उठाते ही वो कुत्ते भाग गए ।
कब्रस्तान में कुछ अजीब से शांति थी । आज ही के दिन किसी का अंतिम संस्कार हुआ था शायद क्योंकि एक चिता की राख अभी भी गरम थी और धुआ छोड़ रही थी । कब्रस्तान में ही एक बेंच था उसे अपने रुमाल से साफ करके दीपक उस बेंच पर बैठ गया । सिगरेट लाइट करके लंबे लंबे कश मारने लगा ।
माहौल एकदम शांत था । दीपक ने टाइम देखा तो १२ बजकर ३० मिनट हो गए थे मतलब ३० मिनट और रुकना था । उसने अपने दोस्तों को विडिओ कॉल लगाया । किसी ने उठाया नहीं ।
शांत माहौल, धीमी बहने वाली ठंडी हवा इसकी वजह से उसके मन पर प्रभाव होने लगा । उसने बहुत कोशिश की लेकिन उसे बहुत जोर से नींद आ रही थी । आखिरकार उस् बेंच पर दीपक सो गया ।
थोड़ी देर में जब उसकी नींद खुली, तो बहुत सारे लोग वह पर चहल पहल कर रहे थे ।
वो फट से उठा उन लोगों में से एक को पूछा ।
आप लोग कौन है? और मैं यह कैसे आया ?
ये सुनकर वो आदमी जोर जोर से हसने लगा ।
वो सिर्फ इतना ही बोला।
“तुम्हें उस बेंच पर सोना नहीं चाहिए था !!!!!
Short ghost stories in hindi

मनोज की अपने गाव मैं का एक छोटीसी किराने की दुकान थी । किराने का
सब माल खतम होने को आया था तो दूसरे दिन मनोज शहर की ओर माल लाने के लिए निकला । लेकिन उसका ये फैसला उसे बहुत महंगा पड़ा । क्योंकि उस दिन शहर में बहुत भीड़ थी । बड़े होलसलेर के दुकान से माल निकालते निकालते उसे शाम हो गयी । अब शहर से उसका गाव
लगबग ४० किलोमीटर दूर था । वो जल्दी से अपने गाव की ओर जाने निकल तो बीच रास्ते में ही उसकी गाड़ी बंद पड गयी । उसका नसीब अच्छा था के पास ही में एक मेकनीक था । लेकिन गाड़ी स्टार्ट करते करते रात हो गई । मनोज ने अपना समय बचाने के लिए शॉर्टकट का रास्ता चुना । लेकिन जल्द ही उसे इस चीज का पछतावा होने लगा । रास्ता बहुत ही खराब था , निर्जन था । उसने बाइक का स्पीड बढ़ाने की कोशिश की लेकिन खराब रास्ते की वजह से यह बात नामुमकिन सी लग रही थी । अंधेरा था, और आज अमावस की रात भी थी । वो डरपोक नहीं था लेकिन माहौल डरावना था ।
अचानक उसने आयने में देखा तो कोई डरावनी चीज उसे घूर रही थी । उसने गाड़ी रोकी और पीछे मुड़कर देखा तो कोई नहीं था लेकिन बड़ी दूर से दो लाल बिन्दु उसे दिखाई दे रहे थे । अपना वहम समझकर उसने फिर से गाड़ी शुरू कर दी । थोड़ी देर बाद उसे फिर वही एहसास हुआ । उसने पीछे मुड़कर देखा तो चमकीली लाल आंखे उसे घूर रही थी । अब वो डर गया । उसने गाड़ी का स्पीड बढ़ाया । दस मिनट बाद जब उसने पीछे मुड़कर देखा तो वही लाल आँखें उसका पीछा कर रही थी । अंधेरे की वजह उन आँखों के सिवा कुछ नहीं दिख रहा था ।
अब तो वो आँखें और भी पास आ रही थी । वो डर के मारे पूरा पसीने से भीग गया । वो और जोर से गाड़ी भगाने लगा थोड़ी देर में उस बस्ती दिखाई दी तो उसके जान में जान आ गई । उसने फिर अपनी बाइक धीमी कर ली । थोड़ी हिम्मत करके उसने पीछे देखा तो वो आँखें आब उसका पीछा नहीं कर रही थी ।
हुश्…
उसने गहरी सांस ली । फिर वो गाड़ी चलाता रहा तो एक घर उसे दिखा । एक बूढ़ा आदमी घर के बाहर खाट पर बैठ कर बीड़ी फूँक रहा था । मनोज ने फिर उस बूढ़े आदमी को आवाज लगाई ।
“चाचा जी !”
“कौन है?”
“बहुत प्यास लगि है, पानी मिलेगा क्या?”
“लाता हु, रुको”
वो बूढ़ा आदमी घर के अंदर गया और लौटे मैं से पानी लाकर उसे दिया । मनोज ने पानी पीकर खत्म कर दिया और खाली लौटा उस बूढ़े आदमी के हाथ में देने लगा । लेकिन अब
उसके गले में जलन होने लगि थी । मनोज ने उस बूढ़े आदमी की ओर देखा । वो बुड्ढा उसे ही घूर रहा था, अपने लाल आँखों के साथ !!!!!
