A love story in hindi- मैं और वो
मैं और वो । आज मैं ऐसे ही पुराने गीतों का मजा ले रहा था ।
मेरे बेटे ने अपने पहले सैलरी से मुझे सा रे गा मा कारवाँ गिफ्ट किया था । मूड था इसीलिए पुराने गाने सुन रहा था । मेरे बेटे के लिए लड़की वाले रिश्ता देखने आने वाले थे । उनको आने में अभी वक्त था तो आईने भी आंखे बंद करके गाने गुनगुना रहा था ।
किशोर कुमार का ‘ओ साथी रे’ गाना लगा और अनजाने में थी मैं अपने कॉलेज के दिनों में पहुच गया ।
अपने कॉलेज के दिनों में मेरी एक क्रश थी । वैसे तो उसे भी मैं पसंद था लेकिन ना उसने कभी मुझे पूछा नहीं और मेरी कभी हिम्मत नहीं हुई । बड़ी ही अजीब कशमकश मे थे मैं और वो !
लता ! नाम के जैसे ही वो कोमल नाजुक थी । दुबली पतली, लेकिन सुंदरता तो मानो खानदानी थी । उसके आरसपानी खूबसूरती के सामने कॉलेज के सारी लड़किया फीकी थी । मुझे सारा धुंदला दिखाई देता था । दिखते थे तो सिर्फ दो राजहंसों का जोड़ा ! मैं और वो !

मुझे अभी भी याद है मैं जिस बेंच पर बैठता था उसी लाइन में वो आखिर में बैठती थी । कभी कभी चुपके से हमारी नजर एक दूसरे से मिलती मैं तो आसमान में उड़ना ही बाकी रहता ।और वो शरमा के नजर झुका लेती थी । मैंने उसे कई सारी चिट्ठियाँ लिखी लेकिन उसे देने की कभी हिम्मत नहीं हुई । न जाने किस चीज से डरते थे मैं और वो ! मुझे पता था लता भी मेरे लिए कुछ लिखती थी लेकिन उसने भी मेरी तरह मौन व्रत पाल रखा था । हमने चुप्पी तोड़ी नहीं उसने मुह खोला नहीं । बिल्कुल एक जैसे थे । मैं और वो !
कॉलेज खत्म होते ही हमारे रास्ते अलग हो गए । उस जमाने में मोबाईल या सोशल मीडिया नहीं था ।
उसके बाद मुझे उसकी कोई खबर नहीं थी ।
३० साल बीत गए । लेकिन मेरे मन में वो अभी भी वैसी ही थी । नाजुक, कोमल, आरसपानी खूबसूरत!
एक अजीब स सपना सपने में सिर्फ मैं और वो !
दरवाजे के बेल से मेरे खयालों की ट्रेन रुक गयी ।
मेरे धर्मपत्नी ने दरवाजा खोला ।
लड़की वाले थे ।
और उसमे वो भी थी !
लता!
अब तो बाल सफेद हो चुके थे । चेहरे पर झुर्रिया आने लगी थी । मैंने उसे पहचान लिया और उसने भी शायद मुझे पहचान लिया क्योंकि इस बार भी उसने मुझे देखते ही नजरे झुका ली ।
लेकिन इस बार वो अलग रोल में थी इस बार वो मेरी प्रेमिका बनकर नहीं तो लड़की की माँ बनकर आयी थी ।
लड़की वालों को रिश्ता पसंद आया । मेरे बेटे को भी लड़की पसंद आयी । क्यों ना आती ! लता की बेटी जो थी!
एक ही मीटिंग में रिश्ता तय हो गया । लेकिन बेचारी वो सारा वक्त नजरे झुकाकर ही बात कर रही थी ।
सगाई की तारीख फिक्स हो गयी ।
लड़की वाले अब जाने लगे ।
जाते जाते एक बार उसने अपनी नजर उठाई । और मुझे बोली ।
“हम् निकलते है, सगाई के दिन मिलेंगे समधी जी”
जब सब लोग निकल गए तब मैं उठा आयने में खुद को देखा ।
“अब बाल काले करने होंगे”
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