Sad Shayari

मेरे हाथों से वो छूट रहा है

दर्द हो रहा है सीने में

लगता है कुछ टूट रहा है

खुश दिखा रहा है वो खुदकों मुझे पता है

वो अंदर ही अंदर फुट रहा है

उसको भूलना मुश्किल तो है

मेरी यादों का मंजर मुझसे रूठ रहा है

क्या बदनसीब है यार मेरा जिसने मुझे चुना

अब तो वो खुद ही खुद को लूट रहा है

ये हवाये ये बादल किसी काम के नहीं है अब

साँसे तो चल रही  है लेकिन

मेरा दम घुट रहा है

हाँ मेरे हाथों से वो छूट रहा है

Leave a Comment