मेरे हाथों से वो छूट रहा है
दर्द हो रहा है सीने में
लगता है कुछ टूट रहा है
खुश दिखा रहा है वो खुदकों मुझे पता है
वो अंदर ही अंदर फुट रहा है
उसको भूलना मुश्किल तो है
मेरी यादों का मंजर मुझसे रूठ रहा है
क्या बदनसीब है यार मेरा जिसने मुझे चुना
अब तो वो खुद ही खुद को लूट रहा है
ये हवाये ये बादल किसी काम के नहीं है अब
साँसे तो चल रही है लेकिन
मेरा दम घुट रहा है
हाँ मेरे हाथों से वो छूट रहा है