भाग ४
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“सर कहा खो गए?”
मि. गुप्ता ने सुमित को पूछा.
“अ… ? अरे वो लड़की !”
अपना हाथ उस लड़की के दिशा में लहराते सुमित बोल रहा था ।
“वो लड़की तो कब की चली गई, आपके शो का टाइम हो रहा है जल्दी से तैयार हो जाइए”
मि. गुप्ता को शायद शो का टेंशन था । आखिरकार वो सुपरस्टार सिंगर सुमित के मैनेजर थे ।
सुमित कपड़े बदलकर बॅकस्टेज पहुचा ।
शो चालू होने में अभी ५ मिनट बाकी थे । उसने पर्दा उठाके देखा इसबार रिकार्ड ब्रेक भीड़ थी । सभी सुमित का नाम चिल्ला रहे थे । उसने अपनी आखें बंद की गहरी सांस ली और धीरे धीरे सांस छोड़ने लगा । ऐसा ३-४ बार करने के बाद उसे थोड़ा हल्का महसूस होने लगा ।
शो के होस्ट ने सुमित का नाम पुकारा । सुमित ने अपनी आँखें खोली धीरे से स्टेज पर आया अपना माइक चेक किया ।
फिर अगले ३ घंटे तक उसने अपनी आवाज से सभी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया । उसके कई सारे गानों को वन्स मोअर मिला । इसबार का शो सबसे ज्यादा हिट था । शो खत्म होने का व्यक्त हो गया । सुमित ने सभी को झुककर अभिवादन किया । वो बॅकस्टेज को जाने के लिए मूडा और अचानक उसे कुछ दिखा । नीचे ऑडियंस के तीसरे नंबर को रो में ‘वो’ थी ।
वही चश्मा, वही मुस्कान, वही नजर वो…. वो श्रुति थी ।
क्या ये सच है या सपना? चलो खुद जान लेते है ऐसा बोलकर सुमित ने आव देखा न ताव सीधे स्टेज के नीचे कूद गया ।
“ऐसा तो प्लान में नहीं था”
गुप्ताजी चिलाये । सब फॅन पागल हो गए । सुरक्षा कर्मियों के पसीने छूट गए । वो जल्दी से सुमित के ओर भागे । सुमित का इन सबका लेना देना नहीं था । सुमित धीरे धीरे भीड़ को बाजू करके श्रुति के पास जा रहा था । उसके आँखों में आंसू थे ।
“श्रुति……..!”
वो जोर से चिल्लाया । वो अब जोर से रो रही थी ।
एक घंटे के बाद सब शांत हुआ । अब बॅकस्टेज पे सिर्फ दो लोग थे । श्रुति और सुमित !
दोनों में से कोई बात नहीं कर रहा था । बहुत देर बाद श्रुति ने चुप्पी तोड़ी ।
“तुम्हें कुछ नहीं कहना?”
“क्या बोलू ? इस तरह बीच रास्ते तुम मुझे छोड़कर चली गई इसका शुक्रिया कहू?”
सुमित का गुस्सा अब फुट रहा था ।
“तुम्हारा गुस्सा होना मैं समझ सकती हूँ”
“तुम कुछ नहीं समझती श्रुति, अगर कुछ समझती तो मुझ से झूठ नहीं बोलती”
“मैंने क्या झूठ बोला?”
श्रुति नीचे देखकर बातें कर रही थी।
“तुमने मुझे कहा था तुम बैंगलुरु जा रही हो, तुम्हारे ऑफिस में तुम्हारा प्रमोशन हुआ है, लेकिन वैसा कुछ नहीं था तुम बैंगलुरु में नहीं थी और न ही मुंबई के ऑफिस में”
“मेरी बात सुनो …”
“मुझे कुछ नहीं सुनना, मैंने तुमको कितना ढूंढा तुम्हें पता भी नहीं”
सुमित का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा था।
“मुझे माफ कर दो सुमित मेरी मजबूरी….”
“क्या मजबूरी थी तुम्हारी ? यही की तुम्हारी नौकरी छूट गई, तुम्हारे मकान मालिक ने तुम्हें घर से बाहर निकाल दिया?”
“तुम्हें सब पता था?”
“हाँ मैंने सब पता कर लिया, मेरा पहले अल्बम रिलीज होने का बाद मैं जब मुंबई आया तब मैंने तुम्हें बहुत ढूंढा श्रुति, लेकिन तुम कही नहीं थी ।
सुमित फुट फुटकर रोने लगा । श्रुति उसके पास आयी । उसके कंधे पर हाथ रखकर बोली ।
“आय एम सॉरी सुमित, मुझे पता है तूम किस हालत से गुजरे हो, मैं तुम्हारी गुनहगार हूँ, जो चाहे सजा दे दो”
“अब तुम्हें क्या सजा दू?, मेरे हर शो के बाद मैं तुम्हारे नंबर पर कॉल करता था और हर बार तुम्हारा फोन स्विच ऑफ आता था, मेरे मन में आता के ये शोहरत ये शो सब छोड़कर कही चला जाऊ लेकिन तुम्हारी आवाज मुझे ऐसा करने से रोकती थी”
‘तुम बिल्कुल अनप्रोफेशनल हो’
“और फिर मैं अगले शो के लिए तैयार हो जाता”
इस बात पर श्रुति मुस्कुरायी ।
“तुम गलत समझ रहे हो, तुम्हारे हर शो मैंने लाइव देखा है, तुम्हारा कोई भी शो मैंने कभी मिस नहीं किया”
“तो फिर मुझे मिली क्यू नहीं ?”
“क्योंकि मैं डरती थी, तुम कैसे रीऐक्ट करोगे, क्या बोलोगे, और मुझे ये भी पता करना था के तुम मुझसे अभी भी प्यार करते हो या नहीं!”
“फिर पता चला या नहीं?”
“हाँ बिल्कुल,”
श्रुति फिर से मुस्कुरायी ।
“कैसे?”
सुमित ने पुछा ।
“तुम्हें आज कोई मिलने आया था क्या?”
श्रुति ने मुस्कुराते पूछा ।
“आज ? हाँ एक लड़की आई थी गीता”
“वही गीत मेरे बचपन की सहेली है, मैंने ही उसे तुम्हारे पास भेजा था”
“क्या बात कर रही हो?”
“हाँ सुमित, और तब मुझे पता चला की तुम अभी भी मुझसे प्यार करते हो”
“लेकिन तुम मुझसे प्यार नहीं करती”
सुमित ने कठोर स्वर में कहा । जाहीर है इतने सालो का इंतजार था । वो गुस्सा इतने जल्दी शांत नहीं होने वाला ।
“ऐसा क्यू बोल रहे हो?”
श्रुति ने डरते हुवे पूछा ।
“तुम्हारे कंगन कहा है श्रुति ?”
उसका हाथ अपने हाथ में लेके सुमित ने पूछा ।
“जो कंगन तुम्हारी माँ ने तुम्हें दिए थे, तुमने बेच दिए ना ?, मुझे गिटार खरीदने के लिए?”
श्रुति के पास कोई जवाब नहीं था ।
“”तुम्हें कैसे पता चला ?”
“तुम बहुत बुद्धू हो, पहली बात तो पापा को लिखना नहीं आता तो वो मुझे कैसे चिट्ठी लिखते? और जब मैंने तुम्हें मेरे फ्लॅट में बुलाया तब तुम्हारे हाथ में वो कंगन नहीं थे, मैं तभी समझ गया के तुमने वो कंगन बेच दिए है”
“मैं सच में बुद्दू हूँ!”
अपने सर पर हाथ रखकर श्रुति ने कहा ।
“तुम क्यू चली गई श्रुति? तुम्हें पता है……”
वो अपनी बात पूरी करे इससे पहले श्रुति ने उसे कहूं लिया ।
“ये क्या था ?”
अपने होंटों में उँगलिया रखकर सुमित ने पूछा ।
“अब कुछ मत बोलो, इतने दिन तुमने मेरा इंतजार किया ना उसका इनाम है ये”
“ये… ये इनाम और एक बार मिल सकता है क्या?”
श्रुति जोर से हसने लागि ।
“नौटंकी ! अब ये झुठ का गुस्सा छोड़ो और कही पर चलो”
“रुको मुझे तुम्हें कुछ दिखाना है”
फिर सुमित ने मि. गुप्ता को कॉल लगाया । थोड़ी देर में गुप्ताजी हाथ में एक बॉक्स लेकर आए । वो बॉक्स श्रुति के हाथ में देकर सुमित ने कहा ।
“चलो अभी इसे जल्दी खोलो”
श्रुति ने बॉक्स खोल । उसकी आंखे बड़ी हो गयी ।
“ये तो वही कंगन है”
“हाँ वही है”
अब सुमित मुस्कुरा रहा था।
“तुमको कैसे मिले लेकिन ये?”
“मेरा पहला एलबम रिलीज होने के बाद मैं जब वापस लौटा तब ही मैंने सोच की तुम्हें तुम्हारे कंगन खरीद लू लेकिन तुम्हारा कही आता पता नहीं था, फिर मैंने तुम्हारे एरिया के सभी ज्वेलरी में ढूंढा तो मुझे ये कंगन मिल गए और फिर मैंने वो खरीद लिए”
“तुम सच में पागल हो सुमित”
वो दोनों हसने लगे । साथ में दोनों के आँखों में आँसू भी थे ।
“मुझे बहुत भूख लगी है”
सुमित ने मासूमियत से कहा । श्रुति को वही पुराना दौर याद आ गया ।
“अरे मेरे शोना को भूख लागि है ! चलो फिर बोलो कहा चलना है?”
श्रुति ने प्यार से उसके चेहरे पर हाथ फेरते हुवे पूछा ।
“वही पर जहाँ हमने बहुत सारा वक्त साथ में गुजारा है”
“बॉम्बे कॉफी हाउस?”
सुमित ने हामी भरी ।
और आखिरकार सुमित ने श्रुति को कसके गले लगाया । शायद उसके पुराने दिन फिर से लौट आए थे । उसका प्यार उसके ज़िंदगी में फिर से लौट आया था । तभी गुप्ताजी वह पर आए ।
“सर अगला शो…”
वो कुक कह पाते इससे पहले सुमित ने कह दिया ।
“कैन्सल कर दो”
अभूत दिनों के बाद वो श्रुति से मिल रहा था ये लम्हा उसे जीना था ।
“तुम बिलुकल अनप्रोफेशनल हो”
श्रुति ने उसके कानों में कहा ।
“हाँ मैं हूँ”
और फिर उसने फिर से श्रुति को गले लगाया ।
(THE END..…?)