Muhammad Tughlak: मूर्ख या विद्वान ?

          मुहम्मद तुग़लक के मूर्खता का कई सारे किस्से इतिहास में परिचित है । यह किस्सा भी बड़ा रोचक है । उसका पूरा नाम था जूना खान मुहम्मद बिन तुगलक . अपने पिता गयासुद्दीन तुग़लक के मृत्यु के बाद मुहम्मद तुगलक दिल्ली के गद्दी पर बैठा । तुगलक ने सन १३२५ से लेकर १३५१ तक दिल्ली पर राज किया ।

        तुगलक को विद्वान मूर्ख भी कहा जाता है क्यूंकी वो काफी पढ़ लिखा था । एक गणित तज्ञ और एक यूनानी चिकित्सक भी था । उसकी हर एक योजना इसलिए विफल होती थी क्योंकि वह समय से बहुत आगे की सोचता था । इसी वजह से उसे पगला मुहम्मद भी कहा जाता है । वो जमीनी हकीकत को नजर अंदाज करके बड़ी ही जल्दबाजी में अपनी योजना को अमल में लता था । इसके परिणाम स्वरूप उसके प्रजा जन को बहुत सारी कठिनाइयों को झेलना पड़ा ।

      ऐसे ही उसके दिमाग में एक योजना आयी । दिल्ली पर हमेशा मध्य एशिया से आने वाले मंगोल का खतरा रहता था । मंगोल उस वक्त बहुत सारी लूट करते थे और्व इसकी वजह से सम्पन्न दिल्ली तथा आस पास के राज्यों की स्थिति बद से बत्तर हो जाती । तुगलक ने तय किया की अपने साम्राज्य की राजधानी दिल्ली से स्थलांतरित करके दक्षिण की ओर दौलताबाद किले में ले जाए  ।

      दौलताबाद जो की अब महाराष्ट्र राज्य में औरंगाबाद जिले में स्थित है और दिल्ली से लगभग १५०० किलोमीटर दूरी पर है । तुगलक का मानना था की दिल्ली की तुलना में दौलताबाद किला भारत के बिल्कुल मध्य भाग में स्थित है और सुरक्षित भी । दौलताबाद स्थलांतरित होने के बाद दख्खन के आस पास का प्रदेश तथा दक्षिण भारत के सम्पन्न प्रदेश पर उसका नियंत्रण और मजबूत हो सकता था । गुजरात और कोरों मण्डल के किनारों के बंदरगाहो पर दौलताबाद से निगरानी करने की योजना उसके मन में थी । जिसका फायदा तुगलक को आंतरराष्ट्रीय व्यापार के वृद्धि में हो सकता था ।

      तुगलक को लगता था की वो प्रजा के हित में सोचता है । वो खुदकों दयालु सुल्तान मानता था । राजधानी के स्थलांतरण का फरमान जब उसने जारी किया तब बहुत सारे लोग थे जो इस फैसले के पक्ष में नहीं थे । तुगलक ने २ साल उसकी इस स्थलांतरण को योजना को अमल में लाने के लिए पानी के तरह  पैसा बहाया । दिल्ली से लेकर दौलताबाद तक पक्का रास्ता बनवाया । रास्ते के दोनों बाजू में छाव के लिए पेड़ लगाए । खाने पीने की व्यवस्था जगह जगह पर की ।

लोगों को दिल्ली छोड़ने का आदेश देने के बाद जब कई लोग अपना घर, व्यापार छोड़ने के लिए तैयार नहीं थे तब इस दयालु सुल्तान ने अपने सैन्य बल का इस्तेमाल करके लोगों को जबरदस्ती मार पीट कर घर से बाहर निकलवाया । अपनी उदारता दिखने के लिए मूर्ख तुग़लक ने प्रजा को पैसे भी बाँटे ।

   जब जोर जबरदस्ती से लोग दिल्ली से नए राजधानी के ओर जाने लगे तब तुगलक की एक और मूर्खता का प्रदर्शन हो गया । उसने गर्मियों के दिनों में इस यात्रा की शुरुवात की थी । जो आमिर लोग थे उनके पास घोड़े थे लेकिन गरीब लोगों के पास् पैदल चलने के अलावा कोई और रास्ता नहीं था । ऐसे जलती गर्मी में लोगों का बहुत बुरा हाल हुआ । जब डोली के लोगों ने अपना घर छोडा तब दिल्ली जैसा समृद्ध शहर वीरान हो गया और एशिया का सबसे सम्पन्न शहर खंडहर में बदल के गया ।

  इस कई महीनों के यात्रा में लोगों का जीना दुसवार हो गया । कोलोरा जैसी अनेक बीमारियों के वजह से लोगों को अपनी जान गवानी पड़ी । लगभग आधे लोग तो दौलताबाद पहुचने से पहले ही मर गए ।

  दौलताबाद पहुचने के बाद भी लोगों का कठिन दौर खतम नहीं हुआ । पीने और इस्तेमाल के पानी की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण लोगों का मनोबल और कम हो गया । राजधानी के स्थलांतरण के २ साल में ही तुगलक के सियासी दावपेंच असफल होने शुरू हो गए । बिहार और बंगाल में विद्रोह उठा था । उतार भारत पे उसका नियंत्रण छूटने लगा था  । उत्तर-पश्चिम सीमा पर भी यही हालात थे ।

दिल्ली से दूर होने की वजह से इन सब समस्याओ को खतम करना असंभव था । तुगलक के दुर्भाग्य से लगातार २ साल तक दौलताबाद किले के इलाके में अकाल पड़ा । इन सब से तंग आकर तुगलक ने फिर दिल्ली जाने का आदेश दिया । राजधानी को फिर से स्थलांतरित करना पड़ा । उसके सैन्य ने फिर लोगों के घर जाकर मार पीट कर जोर जबरदस्ती से उनको बाहर निकाला ।  एक बार फिर लोगों की बेहद दर्दनाक यात्रा की शुरुवात हुवी । एक बार फिर कई सारे लोगों की रास्ते की तकलीफ और बीमारी के वजह से मौत हुवी ।

सच कहते है मूर्खता की कोई सीमा नहीं होती  

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