मैंने सूरज को ढलते और चाँद को पिघलते देखा है
मैंने खुदा तो नहीं देखा अपने बाप को देखा है
जब डांटते है वो
तो मुझे डर लगता है
उसी वक्त उनकी आँखों में मैंने प्यार भी देखा है
मेरे दुश्मन जलते है
मेरी माँ के प्यार से लेकिन
मेरे बाप के खौफ से
उनको दूर भागते देखा है
सब परेशान है बाप की पोलादीपन से
लेकिन
मैंने उनको अकेले में रोते देखा है
अब मुश्किले ज्यादा नहीं आती ज़िंदगी में
लगता है उसने भी मेरे बाप को मेरे पीछे देखा है
सोया नहीं हु उस रात पेट भर खाना खाके
जिस वक्त मैंने मेरे बाप को
भूखे पेट सोते देखा है
दर्द भी सोच में है इसे और क्या दर्द दु
उसने भी मेरे बाप को हलाहल पीते देखा है
मैंने सूरज को ढलते और
चाँद को पिघलते देखा है
मैंने खुदा तो नहीं देखा
अपने बाप को देखा है