best fathers day Shayari

मैंने सूरज को ढलते और चाँद को पिघलते देखा है

मैंने खुदा तो नहीं देखा अपने बाप को देखा है

जब डांटते है वो

तो मुझे डर लगता है

उसी वक्त उनकी आँखों में मैंने प्यार भी देखा है

मेरे दुश्मन जलते है

मेरी माँ के प्यार से लेकिन

मेरे बाप के खौफ से

उनको दूर भागते देखा है

सब परेशान है बाप की पोलादीपन से

लेकिन

मैंने उनको अकेले में रोते देखा है

अब मुश्किले ज्यादा नहीं आती ज़िंदगी में

लगता है उसने भी मेरे बाप को मेरे पीछे देखा है

सोया नहीं हु उस रात पेट भर खाना खाके

 जिस वक्त मैंने मेरे बाप को

भूखे पेट सोते देखा है

दर्द भी सोच में है इसे और क्या दर्द दु

उसने भी मेरे बाप को हलाहल पीते देखा है

मैंने सूरज को ढलते और

चाँद को पिघलते देखा है

मैंने खुदा तो नहीं देखा

अपने बाप को देखा है 

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