lover of allauddin khilaji : malik kafur

अलाउद्दीन खिलजी का प्रेमी : मलिक काफ़ुर

मलिक काफ़ुर

पद्मावत मूवी में आपने देखा होगा की अलाउद्दीन खिलजी के पास ए ऐसा हुकुमी एक्का था जो  उसकी हर एक हुक्म को अमल में लाता था । आज हम उसी के बारे में जानेंगे ।

    मलिक काफूर जो की एक क्रूर, कातिल और ताकदवान  योद्धा था ।  वो अलाउद्दीन खिलजी का समलैंगिक प्रेमी था ।  दर असल जन्म से वो एक हिन्दू ब्राह्मण था जिसका जन्म महाराष्ट्र के छोटे से गाव में हुआ । उसका असली नाम माणिक था । माणिक दिखने में बेहद सुंदर और आकर्षक था । वो महज ९ साल का था जब एक गुनहगार के गिरोह  ने उसका अपहरण करके गुजरात के खंबात शहर में बेंच दिया । उस वक्त खंबाट शहर एक आंतरराष्ट्रीय बंदरगाह था । वहाँ पर गुलामों की खरीदी और बिक्री होती थी । दुनिया के लगभग सभी प्रांतों से लाकर गुलामों, स्त्री , पुरुष छोटे बच्चों को खरीदा और बेचा जाता था ।

   माणिक की खूबसूरती देखकर वहाँ के सबसे बड़े रईस अमीर ख्वाजा ने उसे खरीद लिया । अमीर ख्वाजा माणिक पर जान छिड़कता था । माणिक उस वक्त सभी लोगों में बहुत लोकप्रिय होने लगा । उसकी खूबसूरती के वजह से वहाँ के कई सारे लोगों ने उसे खरीदने के लिए हजारों दिनार का प्रस्ताव भी रखा । इसीलिए उसका नाम हजार दिनारा लौंडा भी पड़ा । माणिक का धर्म बदलकर उसे इस्लाम में लाया गया और फिर उसका नाम रखा गया मलिक काफूर ।

      मलिक काफी बुद्धिमान था । इसी दौरान् उसने युद्धकला भी सिख ली । उसे मराठी, फारसी, गुजराती ऐसी कई सारी भाषा अवगत थी । दिल्ली सल्तनत के शासक सुल्तान जलालूद्दिन खिलजी का एक सैन्य अधिकारी नुसरत खान ने गुजरात पर हमला किया । नुसरत खान ने हजार दिनारा लौंडा मलिक काफूर के बारे में बहुत सुना था । तो उसने अमीर ख्वाजा से मलिक को जीत के तौर पर ले लिया । दिल्ली के सुल्तान जलालूद्दिन खिलजी का भतीजा अलाउद्दीन उस समय एक सैन्य अधिकारी था । अलाउद्दीन को खुश करने के लिए नुसरत ने मलिक काफ़ुर को भेट की रूप में अलाउद्दीन को पेश किया । इस नजराने से अलाउद्दीन काफी खुश हुआ । थोड़े ही दिनों में मलिक ने अपनी मीठी जुबान और बुद्धिमानी से अलाउद्दीन का सबसे भरोसेमंद और करीबी सेवक बन गया । अलाउद्दीन हर बात पन मलिक काफ़ुर की सलाह लेने लगा । उसपर खिलजी आंखे मूंदकर विश्वास रखता था । अपने चाचा और ससुर जलालूद्दिन खिलजी कत्ल करके अलाउद्दीन दिल्ली के तख्त पर बैठ गया । मलिक और उसके करीबी रिश्ते की वजह से मलिक पहले सुभेदर और बाद में वजीर भी बन गया । सल्तनत में अलाउद्दीन के बाद सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति मलिक काफ़ुर था ।

       अलाउद्दीन के साम्राज्य विस्तार के लिए काफ़ुर ने कई सारे जंगों का नेतृत्व किया । मलिक काफ़ुर को काभी हार का सामना नहीं करना पड़ा ।  वो बेहद क्रूर किस्म का इंसान था । जीते हुवे प्रदेश में वो कत्ले आम मचाता ।

         उसने सन १३०६ में मंगोलों को हराकर उन्हे वापिस खदेड़ दिया । सन १३०८ में देवगिरि साम्राज्य को जीतकर नष्ट कर दिया । काकतीय  साम्राज्य के राजा रुद्र प्रताप को हराकर दुनिया का सबसे नायाब कोहिनूर हीरा छिन लिया । कोहिनूर हीरा जीतने के बाद मलिक ने बड़े प्यार से उसे अलाउद्दीन खिलजी को पेश किया । सन १३११ में मलिक ने कर्नाटकी साम्राज्य हौसलेस को परास्त किया और इसी साल तमिलनाडु के पाण्ड्या साम्राज्य को हराकर खिलजी सल्तनत में शामिल किया ।

           दक्षिण भारत को लूटकर उसने तबाही मचा दी । केवल मनोरंजन के लिए वो मासूम इंसानों को तड़पाकर मारना उसका पसंदीदा खेल था । मलिक के इस पराक्रम से खुश होकर सुलतान अलाउद्दीन खिलजी ने उसे देवगिरि के सुभेदार के तौर पर नियुक्त किया । मलिक ने इसी देवगिरि का नाम बाद में बदलकर दौलताबाद रख दिया ।

      मलिक के वजह से खिलजी सल्तनत में बरकत आयी थी । अलाउद्दीन अपने सेवक  मलिक पर बेहद प्रेम करता था इसिलए उसने मलिक को खिलजी सल्तनत के मुख्य वजीर के तौर पर नियुक्त किया ।

      सन १३१५ में अलाउद्दीन की तबीयत बिगडने लगी । अलाउद्दीन मलिक काफ़ुर के अलावा किसी और पर भरोसा नहीं करता था इसिलए मलिक की यादें उसे सताने लगी । इसलिए उसने मलिक काफ़ुर को दिल्ली बुला लिया । मलिक अब बहुत महत्वकांक्षी बन गया था । दिल्ली आते हि उसने  सारी सत्ता के सूत्र अपने हाथ में लिए । अलाउद्दीन को मिलने की इजाजत किसी को नहीं थी । खिलजी के परिवार को भी अलाउद्दीन से मिलने की मनाई थी । अपने आखरी समय में खिलजी को पागलपन के दौरे पड़ने लगे । तब मलिक ने खिलजी को लोहे के जंजीरों में जकड़कर एक कमरे में कैद कर लिया । इसी अवस्था में अलाउद्दीन खिलजी की तड़प तड़पकर मौत हो गयी  । खिलजी के मौत के बाद मलिक काफ़ुर को सुलतान बनने की चाह थी लेकिन कुछ सरदारों के विरोध के कारण उसने अलाउद्दीन के छोटे लड़के को दिल्ली के गद्दी पर बिठाकर खुद सर कारोबार देखने लगा । खिलजी की बड़े बेटे ओमर कही इसके बाद सुलतान न बने इसीलिए मलिक ने उसकी आंखे निकाल दी । दरबारी सरदार मलिक को सुलतान के तौर पर स्वीकार करे इसीलिए उसने अलाउद्दीन के विधवा पत्नी से शादी भी कर ली ।

      अलाउद्दीन खिलजी का एक और लड़का था जिसका नाम मुबारक शाह । मुबारक को अपने रास्ते का कांटा समझकर मलिक काफ़ुर ने कुछ पेशेवर कातिलों को मुबारक शाह को मरने के लिए भेजा । लेकिन मुबारक शाह काफी धूर्त और चालक था । मरने आए उन कातिलों को मुबारक खान ने बहलाकर अपने तरफ कर लिया । मुबारक खान ने ज्यादा रकम देकर उन्ही कातिलों से मलिक काफ़ुर का खून कर दिया ।

काफ़ुर के हत्या के बाद मुबारक खान दिल्ली के तख्त पर बैठ गया । सुलतान बनते ही उसने उन सब कातिलों को इनाम के तौर पर मौत की सजा दे दी ।     

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