लास्ट लोकल
१२.१० की लोनावला जाने वाली लास्ट लोकल पकड़ने के लिए मैं भाग रहा था। जोरों से बारिश हो रही थी। बारिश में भीग के जैसे तैसे करके मैं ‘देहु रोड’ स्टेशन पहुंचा। पहुचने में थोड़ा सा लेट हुआ गाड़ी प्लेटफॉर्म पर पहुँच चुकी थी और निकलने ने फिराक में थी लेकिन मैं जोर से भाग कर गाड़ी में चढ़ गया। अंदर सिर्फ पाँच लोग सफर कर रहे थे और मैं छठा ! सबको नजरंदाज करके मैं विंडो सीट पे बैठ गया । मेरा एकदम सिम्पल फंडा है । चाहे सर्दी हो या गर्मी या फिर बारिश का मौसम मैं हमेशा विंडो सीट ओर बैठता हु । बारिश का जोर कम हो गया था । और ठंड भी बढ़ गई । ऐसे माहोल में अगर कोई साथ में रहता तो उससे चिपक कर इस सफर का आनंद लेता । वैसे तो मैं एकदम सभ्य गृहस्थ हूँ । लेकिन किसी के जिस्म की गर्माहट तुम्हें तरोताजा कर सकती है ये मैं जानता हूँ । मेरे अकेले जीवन में कोई तो हो जो सुंदर हो जिसके लंबे बाल हो, उसी लंबे बालों में मेरी पूरी ज़िंदगी उलझा दू । जिसके नाजुक जिस्म पर मैं कुछ लिखावट कर सकु । लेकिन साला इस मामले मेरा नसीब एकदम फूटा हुआ था । इंजीनियरिंग के वजह से कोई लड़की का संबध ज्यादा नहीं आया । वैसे तो मेरे लाइफ में एक दो लड़किया आई थी लेकिन उनमे ‘वो’ बात नहीं थी । जो भी लड़की मुझे पसंद आती थी वो एक तो किसी और को पहले से ही ‘सेट’ हो चुकी थी या फिर मुझे भाई मान चुकी थी । मैंने कहा था न मैं एकदम gentleman बंदा हूँ । किसी को जोर जबरदस्ती करना मेरे उसूलों मैं नहीं था । और ऐसे ही ज़िंदगी कट रही थी । साला! ये बारिश भी न दिल के अरमान जगा देती है । अपने खयालों से बाहर आकर मैंने अपने चारों ओर एक नजर घुमाई । लोकल के डिब्बे में सब शांत शांत था । मेरे सामने वाले सीट पर एक बंदा बैठे बैठे ही सो गया । दूसरा लड़का व्हाट्सप्प चला रहा था । उसके बॅग को देखकर वो कॉलेज जाने वाला लड़का मालूम पड़ता था । । मेरे पास वाला बंदा सूट बूट पहने हुआ था । एकदम शांत था । शायद किसी टेंशन में था । हो सकता है जॉब का टेंशन हो या उसे भी मेरी तरह अकेलेपन सता रहा हो ! मैं चेहरा अच्छे से पढ़ सकता हूँ ।
धीरे धीरे बारिश बढ़ने लगी तो सब लोग पास वाली खिड़की बंद करने लगे । तभी पीछे से एक खूबसूरत लड़की उठी और उसने भी अपने खिड़की बंद कर ली । मैं उसके तरफ देख रहा था । एकदम मेरे सपनों के परी जैसी ! लंबे बाल ! नाजुक बदन ! जिस्म की सजावट तो ऐसी थी के ताजमहल भी शरमा जाए । मैं उसी के तरफ देख रहा था । एक पल उसने मेरी तरफ देखा । वो मुस्कुरायी ! वो क्यू मुस्कुरायी ये शायद उसे भी नहीं पता । और वो फिर से बैठ गई ।
तलेगाव स्टेशन आया तभी बारिश फिर से कम हो गई । तभी जो आदमी सोया था उसका मोबाईल बजा । गाड़ी स्टेशन पर रुकी थी और अभी इतना सन्नाटा था की मुझे मेरे सांस की भी आवाज आ रही थी । उस आदमी ने फोन उठाया ।
“हैलो, क्या हुआ माँ?”
“कहाँ पर हो?”
“अभी तो लोकल में हूँ, क्यू क्या हुआ?”
“कुछ नहीं बेटा, मैंने अभी टीवी पर न्यूज देखि, एक सायको सीरियल किलर बाहर घूम रहा है, लास्ट वाली लोकल पर उसने अब तक सात खून किए है, मुझे तेरी फिकर हो रही है बेटा!”
“माँ… मैं अभी… लास्ट लोकल में ही हूँ “
बोलते वक्त उसके गले में सांस अटक रही थी ।
“चिंता मत करो बेटा, मैं पापा को भेजती हूँ स्टेशन पर, तुम अकेले मत आना”
“ठीक है माँ”
उसने फोन रख दिया लेकिन उसकी ये बातचीत हम सबने सुन ली थी । सबकी हालत खराब हो गई । जो आदमी अपनी माँ से बात कर रहा था, जल्दी से उठा और तलेगाव स्टेशन ही उतर गया ।
गाड़ी शुरू हुई ।
मुझे भी मेरे भाई ‘राज’ ने जो की निगड़ी में रहता था सुबह मेसेज भेजा था इस सीरीअल किलर के बारे में !
मैंने तो पहले ध्यान नहीं दिया लेकिन अब लगता है अकेले लोकल में चढ़ना नहीं चाहिए था ।
अब सिर्फ पाँच लोग थे थे गाड़ी में । और सभी के चेहरे डर से सफेद हो गए थे । शायद उनको भी ये सीरीअल कीलर वाला मेसेज आया होगा ।
या फिर उस आदमी की माँ से बातचीत सुन ली थी । मेरे बाजू वाला तो मुझे ऐसे घूर रहा था जैसे की मैं ही वो सीरीअल किलर हूँ। जो लड़की पीछे बैठी अब वो सामने आकार बैठ गई थी । ये उसकी सुंदरता थी या कुछ और लेकिन मेरे दिमाग से एक बात छूट गई थी । ट्रेन के दरवाजे पर एक और आदमी खड़ा था । इतने बारिश में भी वो भीगकर सिगरेट पी रहा था । उसके पास एक गंदी सा थैला था । उसके कपड़े एकदम फटे हुए थे । इतना भीगकर भी एकदम शांत था । वो बाहर देख रहा था और मैं उसे । अचानक से उसने मेरी तरफ देखा । क्या पता उसके ऐसे देखने से मैं डर गया । उसके आँखों में एक पागलपन की झलक दिखी । क्रूरता तो उसके आँखों से झलक रही थी लेकिन उसके ऐसे देखने से मेरी हालत पतली हो गयी क्यूंकी मैं बहुत जल्दी डर जाता हूँ ।
मैंने झट से उस से नजर हटाके अपने मोबाईल पर विडिओ देखने का नाटक करने लगा । लेकिन मेरा सारा ध्यान उस आदमी पर ही था । तभी मेरे मोबाईल पर एक मेसेज आया । वही मेसेज था जो मुझे राज ने भेजा था । लेकिन इस बार ये मेसेज मुझे महाराष्ट्र पुलिस से भेजा` था । तभी सभी के मोबाईल बजने लगे । सभी को वही मेसेज पुलिस ने फॉरवर्ड किया था । सभी के चेहरे पर डर साफ दिखाई दे रहा था । तभी ट्रेन अगले स्टेशन वडगाव पर पहुंची । तभी वो सूट बूट वाला आदमी जल्दी से स्टेशन पर उतर गया । मेरे मन में खयाल आया की मैं भी इसी स्टेशन पर उतर जाऊ । लेकिन शायद हो सकता था वो सूट बूट वाला आदमी ही सीरीअल किलर हो और मेरा काम तमाम कर दे । तब मैंने ये खयाल मन से निकाल दिया । ट्रेन फिर से शुरू हो गई । वो कॉलेज वाला लड़का अपनी बॅग सीने से लगाकर इधर उधर देख रहा था । वो बहुत डरा हुआ था । अगला स्टेशन ३ मिनट में आने वाला था । मैं सोच रहा था की अगले स्टेशन उतर जाऊ । अगला स्टेशन ‘कान्हे’ जब आया तब वो कॉलेज वाला लड़का उठा और जल्दी से ट्रेन से उतर गया । अब मेरे दिल की धड़कने बढ़ रही थी । मैं इस स्टेशन पर उतार सकता था । लेकिन फिर मैंने मन ने बगावत कर ली । क्यूंकी तब सिर्फ वो लड़की और वो दरवाजे में खड़ा आदमी बचे थे । उस लड़की को उस दरिंदे के साथ छोड़ना मुझे ठीक नहीं लगा । लेकिन लोनावाला पहुचने पे अभी आधा घंटा और था । इतने ठंड मैं भी मैं पसीने से पूरा भीग गया था । वो आदमी लगातार मुझे ही घूरे जा रहा था । इसलिए मैं और टेंशन में आ गया । मैं अपने भाई राज को कॉल करने लगा लेकिन उसी समय नेटवर्क चल गया । मैंने चुपचाप अपना मोबाईल बॅग में रख दिया । वो आदमी अब फिर से सिगरेट पीने लगा । ये उसकी तीसरी सिगरेट थी । मेरा ध्यान उसके थैले पर गया । मैं सोचने लगा उस थैले में क्या हो सकता है ? शायद मारने के लिए कोई हथियार होगा । ये सोचतेही मेरा गला सुख गया । अब सिर्फ हम तीनों लोग थे डिब्बे में । मैं विंडो सीट पर, वो सुंदर लड़की मेरे सामने वाले सीट पर और वो भयानक आदमी डिब्बे के दरवाजे पर ही बैठा था। इतना भीगकर भी उसे ठंड क्यू नहीं लग रही थी?
अगला स्टेशन में आने अभी व्यक्त था । वो खूंखार आदमी अचानक से उठा अपना बड़ा वाला वाला थैला उठाया । वो लड़की अब मेरे पास आकर बैठ गई । उसने मेरी तरफ देखा । उसके आखों में डर साफ दिखाई दे रहा था । वो आदमी अपना थैला लेकर हमरे पास आने लगा । उसके थैली मैसे लोहे का रॉड मुझे साफ दिखाई दिया । मेरे तो सिर्फ अटैक आना बाकी था । वो लड़की अब मेरे और पास आ गई । उसकी साँसे जोर से चल रही थी । लेकिन वो संस्कारी लड़की थी इतने डरावने सिचूऐशन में भी वो मुझसे चिपकी नहीं । साला मेरा दिमाग भी न ऐसे समय में क्या सोचता रहता है ।
वो आदमी मेरे पास आया और अपने विकृत पर्सनैलिटी से एकदम अलग आवाज में मेरे से पुछा ।
“भाईसाब माचिस है क्या?”
मेरे पास जवाब नहीं था मैंने अपनी गर्दन घूमकर ही नहीं है बोल दिया । वो बगल वाले सीट पर बैठ गया ।
जैसे ही ‘कामशेत’ स्टेशन आया गाना गुनगुनाते वो आदमी उतर गया ।
सच में जैसा दिखता है वैसा होता नहीं है । अब डिब्बे में सिर्फ हम दोनों थे । हमने एक दूसरे की तरफ देखा और जोर से हसने लगे । खतरे का समय बीत चुका था । मुझे लगा अब इस लड़की से बात करनी चाहिए ।
मेरा नाम अमित है । मकैनिकल इंजीनियर हूँ, लोनावाला में २ bhk फ्लॅट है । पर नहीं मैं सोच रहा था क्यूंकी जीतने भी खून हुए थे फर्स्ट क्लास में हुए थे,और वो भी लास्ट लोकल में । और जो भी ये सीरीअल किलर है आदमी है या औरत है अबतक ये पता नहीं चल पाया था ।
लड़की कभी सीरीअल किलर नहीं हो सकती है क्या?
अगला स्टेशन लोनावाला था । उसे आने में अभी समय था । मेरा दिमाग न जाने क्या क्या सोच रहा था ।
लड़की भी सीरीअल किलर हो सकती है । क्योंकि सच हमेशा सुंदर और सुसंकृत होता है ।
शायद वो भी यही सोच रही होगी । लेकिन नहीं मैं… मैं तो सुसंकृत gentleman हूँ ।
और फिर मैंने अपने बॅग में हाथ डाला ।
मेरे हाथ में चाकू था और फिर धीरे से मैंने उस लड़की के गर्दन पर घूमा दिया ।

Nice writing ✍👌👍
That final Twist is awesome!!
Well Written!!