कुछ ज़िंदा लाशों पे चल के आया हूँ
मैं अपना किरदार जला के आया हूँ
सपनो का टूट जाना
तो खैर लाज़मी है
मैं सपनो को आग लगाकर आया हूँ
कोयला ही बाकी था उसके बाद
नंगे पैर
उसपर चल के आया हूँ
कुछ जिंदा लाशो पर चल के आया हूँ
मैं अपना किरदार जला के आया हूँ
नरभक्षी समाज का ताना
तो खैर लाज़मी था
मैं अपनो से खंजर खा के आया हूँ
कुछ उछल रहे थे मेरी हार देखकर
उन्ही को ज़िन्दगी के मुक्त करके आय हूँ
कुछ ज़िंदा लाशो पर चलके आया हूँ
मैं अपना किरदार जलाबके आया हूँ
अभी तो आगे और इम्तिहान है
ये मालूम है मुझे
नए जख्मों के लिए पुराने सिला के आया हूँ
अभी पीछे मुड़कर नही देखना मुझे
न जाने किस किस को भुला के आया हूँ
कुछ ज़िंदा लाशो पर चल के आया हूँ
मैं अपना किरदार जला के आया हूँ
इतने सारे राज़ सीने में लेके जी रहा हु मैं
तुम्हे क्या मालूम कैसे पी रहा हु मैं
ये कड़वा प्याला
जिंदगी से कड़वा तो नही
तुम्हारे जख्म इसी शराब से सील रहा हु मैं
जो नजर में तेरे लिए मुहब्बत थीं कभी
उससे नफरत में तब्दील कर रहा हु मैं
तुम्हे क्या मालूम कैसे पी रहा हु मैं
इतने सारे राज़ सीने में लेकर जी रहा हूँ मैं
सिसकना मेरा अभी बन्द हुआ तो नही
फिर भी बारिश में भीग रहा हु मैं
भुलाए हुए वादों का कोई हिसाब नही मेरे पास
अब खुद ही से खुद को मिल रहा हूँ मैं
तुम्हे क्या मालूम कैसे पी रहा हूँ मैं
इतने सारे राज सीने में लेकर जी रहा हूँ मैं
वो दौर अब नही रहा
वो मौसम अब नही रहा
तुमसे इश्क़ करने का
वो ज़ज़्बा अब नही रहा
खुशियो का पता अब गुम हो गया
उन्हें ढूंढना मेरे खयालात मैं नही रहा
वो दौर अब नही रहा
वो मौसम अब नही रहा
जाने अनजाने मैंने
बहूत लोग दुखाये है
उन्हें मनाना मेरे फितरत में नही रहा
दूरियां तेरे से पहले से ही थी
नजदीक तेरे आना मेरे बस में नही रहा
कुछ तो खामी थी मुझ में
जो तू छोड़ के चला गया
तेरे लिए रोना मेरे जज्बात में अब नही रहा
वो दौर नही रहा
वो मौसम अब नही रहा