हमसे अब और सहा नहीं जाता
अब तुझसे ये रिश्ता रखा नहीं जाता
बहुत मजबूर होकर मैं तेरे आँखों से निकला
ज्यादा दर्द अब हमसे सहा नहीं जाता
कहने को तो हमसफ़र थे हम दोनों
तेरे साथ अब हमसे चला नहीं जाता
अब क्या ही कहे
इस अधूरी दास्तान को
अब हमसे और झूठ कहा नहीं जाता
जो भी था सच था
ये वो भी जानता है
दिल का तोड़ना हमसे समझा नहीं जाता
बेहद खुश थे ज़िंदगी के साथ हम
लोगों को हमारा सुख देखा नहीं जाता
आईने तो सच बोलते है की तुम खुदगर्ज हो
हमे हमारा चेहरा देखा नहीं जाता
अकेले चल रहे है आजकल
अब हमसे पीछे मुड़कर देखा नहीं जाता
मेरे टूटने से पहले तेरा गिरना लाजमी था
तुझे पाने के लिए अब हमसे झुक नहीं जाता
ये सच है भूल चुके है तुम्हें
और सच ये भी है की
तेरा खयाल मन से नहीं जाता
क्यों जुड़ा हुए इसका जवाब नहीं है तेरे पास
क्यों साथ थे ये सवाल मन से नहीं जाता
हमसे अब और सहा नहीं जाता
अब तुझसे ये रिश्ता रखा नहीं जाता

Nice…