भाग ३
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गाड़ी के आवाज से सुमित की नींद खुल गई ।
‘क्या ये सपना था ? या हकीकत ? कुछ कह नहीं सकते !
‘नहीं ये सपना नहीं हो सकता ! इन सारे पलों को इन सारे लम्हों को मैंने जिया है ! श्रुति के साथ बिताया हर एक वो पल झूठ नहीं हो सकता ! ये सपना नहीं हो सकता’
सुमित खुद से ही बात कर रहा था । कहीं ये पागल पन तो नहीं ? हो भी सकता है । श्रुति से मिलकर उसे २ साल हो गए थे । २ साल से श्रुति का कोई आता पता नहीं था । हाँ यह पागल पन भी हो सकता है ।
“सब ठीक है न साब ?”
ड्राइवर ने पीछे मुड़कर पूछा ।
“हाँ श्याम सब ठीक है, और कितनी देर है पहुचने में?”
“बस १५ मिनट और साब”
सुमित ने घड़ी में देखा अगला शो शुरू होने में अभी ३ घंटे थे ।
“श्याम सुनो अगले मोड पर एक वाइन शॉप है, वहाँ से एक ‘सिग्नेचर’ फूल लाना”
“ठीक है, और कुछ लाना है क्या साब?”
“हाँ साथ में कुछ स्नैक्स और सोडा भी लेते आना”
श्याम ने रास्ते के बाजू में गाड़ी पार्क कर दी । वो गाड़ी उतरा । थोड़ी ही देर में बोतल लेके आ गया ।
“बहुत देर लगा दी श्याम ?”
“हाँ साब बहुत भीड़ थी वहाँ लोग भी अजीब है किसी भी वक्त ‘पीते’ है”
सुमित हसा । श्याम को अपने गलती का अहसास हुआ ।
“साब मेरे कहने का वो मतलब नहीं था”
“अरे तुम सही कह रहे हो, वो जाने दो एक काम करो यह से राइट में एक सोसाइटी है वह गाड़ी लेलों”
“वह कोई दोस्त है क्या आपका?”
“नहीं वो मेरा पुराना फ्लॅट है, स्ट्रगल के वक्त में वही रहता था”
श्याम सोसाइटी के पार्किंग में गाड़ी पार्क कर दी ।
“सुनो श्याम में आगे जाता हूँ, तुम बोतल लेके रूम नंबर ४०३ में आ जाना”
“हाँ साब”
सुमित धीरे से गाड़ी से उतरा । कोई देख न ले इसीलिए उसने मुह पे रुमाल लगा के चलने लगा ।
उसके फ्लॅट की चाबी हमेशा उसके साथ रहती थी । उसने दरवाजा खोला और कई सारी पुरानी यादें ताजा हो गई ।
‘यहीं पर उसने मेरे लिए कहना बनाया था, यही पर हमने ढेर सारी बातें की थी, यही पर उसने मुझे गले लगाया था आउएर यही पर हम आखरी बार मिले थे’
सुमित फिर से खुद से बात करने लगा । वह बहुत दिनों बाद इस फ्लॅट में आया था । उसका पहला एलबम हिट होने का बाद उसने तुरत ये फ्लॅट खरीद लिया था । मुंबई में लौटने के बाद उसने श्रुति को बहुत कॉल किए लेकिन हर बार उसका फोन स्विच ऑफ ही आता था । श्रुति के घर जाके देखा तो वह ताल लगाया हुआ था । उसने तय किया की बैंगलुरु जा के श्रुति के ऑफिस में पूछूँगा लेकिन वहाँ भी उसे कुछ नहीं मिल ।
इस दौरान सुमित को बहुत सारे ऑफर आने लगे । सिर्फ २ साल में लगातार ३ एलबम सुपरहिट होने के वजह से उसके चर्चे सभी जगह होने लग । सुमित को लाइव शो कॉन्सर्ट भी मिलने लगे ।
सब अच्छा चल रहा था लेकिन फिर भी कुछ अच्छा नहीं था ।
सुमित इन यादों में गुम था की तभी श्याम बोतल लेके रूम में पहुच उसने फ्लॅट के चारों ओर एक नजर घुमाई । वो बोला
“लगता है ये फ्लॅट बहुत दिनों से बंद है, आप थोड़ा बाहर रुको साब मैं बस १० मिनट में सब साफ करके देता हूँ”
“उसकी जरूरत नहीं है श्याम सिर्फ हॉल साफ कर दो तब तक में बालकनी में रुकता हूँ”
श्याम ने किचन से झाड़ू लिया और सिर्फ दो मिनट में पूरा हॉल साफ कर दिया”
“हो गया साब”
श्याम ने सुमित को पुकारा ।
“अरे वा तुमने तो बहुत जल्दी साफ कर दिया, अभी वो टेबल उठाकर लाओ हम साथ में बैठेंगे”
“साथ में…?”
श्याम की आँखों में अविश्वास था ।
“हाँ श्याम आज तुम भी थोड़ा चील कर लो, वो किचन में २ ग्लास पड़े है उनको अच्छे से धोके साफ कर के इढ़ाए लाओ”
“लेकिन साब आपका शो?”
“अरे मैंने कैन्सल कर दिया, तुम चिंता न करो मैंने गुप्ता जी को बोल दिया है”
ये सुनकर श्याम में बहुत उत्साह आ गया । आज उसका मालक खुद उसके साथ बैठकर पीने वाला था । उसने जाकर ग्लास धोकर साफ कर के लाए । टेबल पर रख दिए ।
“तुम अब ये स्नैक्स खोलो तब तक में पेग भरता हूँ”
चार राउंड होने के बाद श्याम आउट हो गया ।
“अब बस हो गया साब, अब ओर नहीं पी सकता’
“अरे श्याम ये लास्ट है इसके बाद खाना ऑर्डर करंगे और फिर तुम सो जाना”
“लेकिन साब आप तो बिल्कुल ठीक है, आपको नहीं चढि क्या?”
सुमित मुस्कुराया ।
“मैं नीट पिता हूँ, आज सोडा के साथ पी रहा हूँ इसलिए मजा नहीं आ रहा “
“मैं जाके और लेके आऊ क्या साब?”
“नहीं इतनी काफी है”
तभी सुमित का फोन बजा । मि. गुप्ता का कॉल था ।
“तुम ये खतम कर लो मैं अभी आया”
ऐसा बोलकर सुमित उठा और बालकनी मैं बात करने के लिए चला गया ।
थोड़ी देर में जब वो वापस आया तो श्याम उसे अजीब सई नजर दख रहा था ।
“साब आपने ये ठीक नहीं किया”
“क्या किया मैंने”
“आप बोले साथ में पियेंगे लेकिन आप सिर्फ सोडा पी रहे है”
सुमित हसा । उसका राज अब खुल गया था । श्याम ने कुछ देर बड़बड़ की और वो वही पर सो गया । सुमित ने उसे उठाकर सोफ़े पे सूल दिया ।
“अब क्या बोलू श्याम!”
लेकिन श्याम तो अब सो गया था । वो खुद से ही बातें कर रहा था ।
“ये आवाज…… ! मुझे पीने नहीं देती…”
‘तुम बिल्कुल अनप्रोफ़ेशनल हो’
सुमित ने अपने कान बंद कर लिए । सुमित ने श्याम की जेब से गाड़ी की चाबी निकाली । फ्लॅट का दरवाजा बाहर से बंद कर के वो शो के लिए चल गया ।
मि. गुप्ता पहले ही कॉन्सर्ट की जगह पर पहुच गए थे । ‘जय हिन्द’ कॉलेज ने बहुत अच्छा इंतजाम कर रखा था । गुप्ताजी सब इंतजाम खुद देख रहे थे । तभी उसने देखा खुद सुमित सर गाड़ी चल कर आ रहे थे । सुमित गाड़ी से उतरा ।
“ये क्या सर, श्याम कहा है ?”
“वो बाद में बताता हूँ, शो शुरू होने में कितना टाइम है?”
“अभी और २ घंटे बाकी है”
“तो फिर मैं अंदर जाता हूँ, थोड़ी रिहर्सल करता हूँ”
“नहीं मुझे भूख नहीं, आप सिर्फ एक ग्लास ऑरेंज जूस भेज दीजिए”
“जरूर सर”
सुमित अंदर जाते ही उसके क्रू में उत्साह आ गया । उसने रिहर्सल चालू कर दी ।
साथ में सुमित उसके बैंड को इन्स्ट्रक्शन दे रहा था । थोड़ी देर बाद गुप्ताजी जूस लेके आए ।
ऑरेंज जूस सुमित के हाथों में देते हुवे उन्होंने कहा
“सर एक लड़की है आपसे मिलने की जिद कर रही है”
“मेरा अभी शो है गुप्ताजी, उसे कह दो मैं नहीं मिल सकता”
“सर मैंने बहुत बार कहा उससे वो आपके हर शो में आकर आपसे मिलने की जिद करती है, आज तो मेरे पैर पकड़ कर जिद करने लगी”
“कहा है वो ?”
“वो उधर है बॅकस्टेज के दरवाजे पे”
सुमित ने एक बार उस लड़की को देखा । वो बहुत ही सुंदर थी । कानों में बड़े बड़े झुमके । चेहरे पर कोई मेक अप नहीं ।
“बुलाओ उसे”
गुप्ताजी ने इशारा कर के उस लड़की को बुलाया । वो भागते हुवे सुमित के पास पहुची ।
भने की वजह से वो हाँफ रही थी ।
“बिग फैन … मैंने … कभी सोच नहीं था की आपसे सच में मिलूँगी ।
“पहले तों सांस लो,”
सुमित ने सलाह दी । उस लड़की के हाथ से नोटबुक लेते हुवे उसने पूछा ।
“नाम?”
“ गीता!”
सुमित ने उस नोटबुक पर औटोग्राफ दिया और फिर उसके के हाथ में वो नोटबुक दे दिया ।
“सर मैं आपको बता नहीं सकती क आज मेरे लिए बहुत बड़ा दिन है”
“बड़ा दिन तो मेरे लिए है, आप जैसे फॅन्स के वजह से ही हमारा वजूद है”
सुमित को बड़प्पन बिल्कुल पसंद नहीं था ।
“सो स्वीट ऑफ यू ! क्या मैं एक सेल्फ़ी ले सकती हूँ?”
“हाँ जरूर क्यूँ नहीं?”
फिर वो लड़की सुमित के बहुत पास आयी । सुमित को कुछ तो स्ट्राइक हुआ ।
उसे कुछ अजीब स लगा ।
“तुम जरा दूर खड़ी रहकर सेल्फ़ी लो तुम फॅन हो गर्लफ्रेंड नहीं”
गीत ने उसकी तरफ देखा वो मुस्कुराई ।
“कोई बात नहीं सर, मैं आपकी गर्लफ्रेंड भी बन सकती हूँ’
उसने ऐसे मादक नजरों से बोला की कोई भी पिघल जाता ।
“देखो गीता, मुझे गलत मत समझो लेकिन मैंने तुम्हें इसीलिए बुलाया क्यूंकी तुम मुझे किसी की याद दिलाते हो”
“ठीक है,समझ सकती हूँ, मुझे बुरा नहीं लगा मैं अब जाती हूँ”
और वो चली गई । सुमित बहुत देर तक उसे देखता रहा । अगर आँखों में चश्मा होता तो ये सेम श्रुति जैसी दिखती । वो सोच रहा था । अचानक उसके दिमाग में ये बात आयी ।
“अरे वो तो बिना सेल्फ़ी लिए ही चली गयी”
(to be continued…)
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