कंगन

भाग २

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भाग 2

      बहुत दिन तक सुमित का स्ट्रगल चल रहा था। कही पर कोई काम नहीं बन रहा था । उसके घर की स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी इसीलिए वो घर से पैसे भी मांग नहीं सकता था । काम न होने के वजह से कई बार तो फ्लैट का हफ्ता भी वो भर नहीं पता था । वो खुद्दार था इसीलिए श्रुति को कुछ नहीं बताता ।  ऐसे में ही एक दिन उसके फ्लैट में श्रुति उससे मिलने आयी । सुमित विचारमग्न था ।

 “क्या हुआ क्या सोच रहे हो?”
     श्रुति ने पूछा तो उसकी विचारों की शृंखला टूट गई।

“अ….. ? कुछ नहीं, सोच रहा हु अपनी बाइक बेच दु”
“क्यू ?”

“अरे वैसे भी इसकी जरूरत नहीं है अब, मैं कही आता जाता नहीं हूँ”
“मुझे पता है तुम्हें फ्लॅट का भाड़ा भरना है और तुम्हारे पैसे नहीं है “
“वो बात नहीं है”
      ऐसा बोल कर  सुमित ने नजर नीचे कर दी ।

“सच बोलो यार! मैं तुम्हें जानती नहीं क्या !”
“नहीं श्रुति वो बात नहीं है, दर असल मुझे गिटार खरीदनी है दो महीनों से ट्राय कर रहा हूँ लेकिन पैसों की वजह से हर बार टाल देता हूँ”

                 ये सुनकर श्रुति सोच में पड़ गई । अचानक से वो बोली ।

“तुम अपने पापा से बात क्यू नहीं करते?”
“नहीं यार, घर की हालत भी इतनी अच्छी नहीं है और पापा तो खेती करके जैसे तैसे घर संभाल रहे है”
“तुम एक बार बात करके तो देखो, वो तुम्हारे पिता है कुछ न कुछ इंतजाम तो कर ही लेंगे”
ठीक है पूछ के देखता हु एक बार पापा से”
“गुड बॉय ! अभी मैं तुम्हारे लिए खाना बनती हूँ”
“अभी ?”
“हाँ अभी क्योंकि तुमने सुबह से कुछ नहीं खाया होगा”
“तुम्हें कैसे पता?”
“मुझे सब पता है”
        ऐसा बोलकर वो किचन में चली गई।

दोनों ने एक ही प्लेट में खाना खाया ।

“प्लेट वैसे ही रख दो मैं धो लूँगा”
“पक्का?”
हाँ”

“ठीक है तो फिर मैं चलती हूँ”
“मैं तुम्हें छोड़ देता हूँ”
“नहीं तुम पापा को कॉल करो मुझे दोस्त के घर जाना है”
                    ऐसा बोलकर वो चली गई । सुमित को अब थोड़ा हल्का लग रहा था । एक अच्छी लड़की के आने से तुम्हारे जीवन में क्या बदलाव आ सकते है इसका अनुभव वो अभी कर रहा था । वो सोच रहा था की श्रुति नहीं होती तो मेरी ज़िंदगी कितनी वीरान होती !

               कुछ दिनों बाद

“हैलो श्रुति, कहा हो?”
“ऑफिस में और कहा !”
“ठीक है कब छूटेगा तुम्हारा ऑफिस ?”
“पाँच बजे कयुया क्या हुआ?”
“कुछ नहीं तुम्हें एक गुड न्यूज देनी है”
“वा…! ठीक है मैं अपना काम खतम कर के तुम्हारे फ्लॅट में ही आती हूँ”
 “जल्दी आना “
       सुमित ने  फोन रख दिया । 6 बजे श्रुति सूके फ्लॅट पहुंची ।

“सॉरी यार, काम बहुत था इसीलिए थोड़ा लेट हुआ”
“कोई बात नहीं, मैं तुम्हें कुछ दिखाना चाहता हूँ”
      ऐसा बोलकर सुमित सोफ़े के पीछे से अपनी नई गिटार उठाई और उसके सामने रखकर बोला ।

“कैसा है सप्राइज़ !”

“वॉव ! तुमने नई गिटार खरीद ली?”   

      उत्साह से श्रुति ने गिटार को अपने हाथ में लिया ।

“हाँ, पापा ने भेज दिए और साथ में ये चिट्ठी भी”
                                सुमित ने अपने हाथों से वो चिट्ठी श्रुति की थमाई ।

प्रिय सुमित,

         तुम तो घर की हालत जानते हो । लेकिन फिर भी सामने वाले बैंक से कर्जा लेके तुम्हें ये पैसे भेज रहा हूँ । उम्मीद है तुम इसका सही इस्तेमाल करोगे । और हाँ तुम्हारी माँ को ये सब मत बताना नहीं तो वो मुझे ही डाँटेगी ।

       अपना खयाल रखना ।

“अब तो तुम खुश हो ना ?”
     चिट्ठी फिर से सुमित को देते वक्त श्रुति ने पूछा ।

“अरे मेरी जान खुशी की बात तो मैंने अब तक कही ही नहीं”
“क्या?”
“मुझे सोनी म्यूजिक से कॉल आया था, उनको मेरी नई धुन बहुत अच्छी लगी इसीलिए उन्होंने मुझे स्टूडियो बुलाया है”
“क्या बात कर रहे हो !”

     खुशी से झूमकर श्रुति बोली ।

“अब तो पार्टी बनती है”
“जरूर देंगे, बोलो कहाँ जाना है ?”

      सुमित बहुत खुश था आज ।
“उससे पहले मुझे भी तुम्हें एक गुड न्यूज देनी है”
“हाँ बताओ जल्दी!”
        सुमित ने अधीरता से कहा ।

“मेरा प्रमोशन हो गया है”
“वा वा क्या बात है ! आज तो सोने पे सुहागा वाली बात हो गयी”

“लेकिन एक प्रॉब्लेम है”
       बोलते वक्त श्रुति नजरे चुरा रही थी ।

“क्या?”
“मुझे बंगलोर को ऑफिस में शिफ्ट करना पड़ेगा”
“इसका मतलब तुम मुंबई छोड़कर चली जाओगे?”
      सुमित ने बड़े मासूमियत से पूछा  । उसके आँखें भर आयी  थी । उसकी ऐसी स्थिति देख कर श्रुति को हसी आयी  ।

“अरे बाबा नाराज मत हो कुछ दिनों की बात है, मैं बाद में ट्रांसफर मांग लूँगी “
“लेकिन तुम कोई दूसरा जॉब क्यू नहीं ढूंढती?”
“इतना अच्छा जॉब में अभी नहीं छोड़ सकती मेरे घर में मैं अकेले कमाती हूँ और इतने शॉर्ट पीरीअड में कोई मुझे दूसरी जॉब नहीं देगा”
“ठीक है”
      सुमित ने आहें भर ली।

“कब जाना है?”
 “ इसी हफ्ते शनिवार को “
                 सुमित की आँखोंसे अब आसू बहने लगा ।

“अरे मेरा बच्चा ! ऐसे नहीं रोते, मैं कहा चाँद पर जा रही हूँ ? महीने में एक बार तो आ सकती हूँ तुम्हें मिलने”
        सुमित ने जोर से श्रुति को गले लगाया । श्रुति के आंखो में भी अब आँसू थे । वो रो रही थी ।  उसे पता था की अब मिलना  मुमकिन नहीं ।

      ( to be continued….)                  

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