कंगन

   सब तालियाँ बजाकर उसकी प्रशंसा कर रह हे थे । वो झुक कर सब को अभिवादन कर रहा था ।

 सुमित शर्मा जो की अब रायजिंग स्टार था इस सब से खुश नहीं था । अंधेरी में उसके इस कॉन्सर्ट शो में हजारों की भीड़ थी । लेकिन उसकी नजर किसी और को तलाश कर रही थी । शायद इस बार भी उसे निराश होना पड़ेगा । अपनी मनपसंद गिटार को बॅग में भरकर वो बॅक स्टेज पहुचा । अपना मोबाईल निकालकर श्रुति को कॉल करने लगा ।

          आउट ऑफ रीच ..! कहकर उसने जोर से फोन फेंक दिया । उसका मैनेजर मि। गुप्ता भागकर उसके पास आया । गुप्ता के लिए ये सब नया नहीं था ।

“क्या हुआ सर?”

            गुप्ता जी ने आदर से पूछा।

“नहीं ! कुछ ठीक नहीं है”

            सुमित का आवाज तो शांत था लेकिन नजरों में गुस्सा था । गुप्ता जी समझ गए ।

“सर अगला शो ..  चार घंटे में ….”
           उसका ये वाक्य पूरा होने से पहले ही सुमित भड़क उठा”
“भाड में जाए शो …! कैन्सल कर दो !”
            कुछ न बोलते हुवे गुप्ता जी जाने लगे । सुमित ने अपनी आँखें बंद कर दी ।

शायद कोई उसे पुकार रहा था । अस्पष्ट रूप से कुछ कह रहा था ।

तुम बिलकुल अनप्रोफ़ेशनल हो !”
     
सुमित ने झट से अपनी आँखें खोली और मैनेजर को आवाज लगाया ।

“गुप्ता जी ….!”
       मि.  गुप्ता मुड़कर चुपचाप उसके सामने खड़े रहे ।

“अगला शो कहा है ?”
“जय हिन्द कॉलेज, चर्चगेट”

“अभी पहुचने में कितना वक्त लगेगा?”
“एक घंटा लगेगा सर”
          ये सुनके सुमित कुछ सोचने लगा ।

“सर रास्ते में एक वाइन शॉप है, आप चाहो तो थोड़ी देर के लिए रीलैक्स हो सकते हो”
“नहीं, उसकी  जरूरत नहीं, ड्राइवर को बोलो गाड़ी निकाले”
       मि.  गुप्ता ने सर हिलाया ।

दो मिनट में ड्राइवर गाड़ी लेकर आया । अपने फैन्स् के बीच में निकलते हुआ सुमित गाड़ी में बैठ गया ।

उसने राहत भरी एक सांस ली और आंखे बंद कर के बैठ गया ।  भूतकाल में घटी हुवी घटनाओं का चित्र उसने सामने एक फिल्म की तरह गुजरने लगा ।

             ( 2 साल पहले )

“मैंने तुमसे कितनी बार कहा है, ऐसे मेरा इंतज़ार मत किया करो!”
            श्रुति ने गुस्से से कहा ।

“तुम्हारा इंतजार ही तो मेरे जीने का सहारा है “
           सुमित ने धीमी आवाज में कहा ।

“तुम्हारा ये शायराना अंदाज तुम्हारे पास रखो, मुझे पता है तुम पिछले 2 घंटे से मेरे ऑफिस के बाहर इंतजार कर रहे हो”
“उसमे क्या है ? हम तो सारी उम्र आपका इंतजार कर सकते है तो ये 2 घंटे क्या चीज है ?

“सुमित, तुम सच में पागल हो !”
“चलो यार. ! बहुत भूख लगी है”
“अरे .. मेरे शोना को भूख लगी है? चलो आज ‘बॉम्बे कॉफी हाउस’ जाएंगे”
                     श्रुति ने अपना हाथ सुमित के चेहरे को सहलाते  हुवे कहा ।  सुमित ने अपनी बाइक स्टार्ट कर दी । श्रुति उसके पीछे एकदम चिपक के बैठ गई । खुश होकर सुमित से ऐक्सेलरैटर जोर से 

घुमाया ।

                    वो दोनों ‘बॉम्बे कॉफी हाउस पहुचे ही थे तब सुमित का फोन बजा । बड़े आतुरता से कॉल उठाया । लेकिन कुछ बात होने के बाद उसका चेहरा उतार गया ।

“क्या हुआ ?”
        श्रुति ने चिंतायुक्त स्वर में पूछा ।

“अरे  यार, लास्ट वीक मैं एक म्यूजिक डायरेक्टर के पास गया था । मेरी काम्पज़िशन सुनाने, वो बोल था की कॉल करूंगा और अभी बोल रहा है मुझे तुम्हारी धुन पसंद नहीं आई तुम कही और पर ट्राय करो”

     सुमित बोलते वक्त उदास था ।

“कोई बात नहीं, हम कही ओर जगह ट्राय करेंगे”
“तुम समझ नहीं रही हो श्रुति, मैंने हर जगह ट्राय  करके देखा “
        उसकी उदासी काम नहीं हो रही थी ।

“ऐसे हिम्मत मत हारो बाबू, हम जरूर कुछ न कुछ करेंगे”
         जब श्रुति ‘हम’ बोलती थी सुमित को बहुत अच्छा लगता था । उसे भी लगता था की मैं अकेला नहीं हूँ । श्रुति आगे बोल रही थी।

“और एक बात तुम्हारा ये जो स्ट्रगल है उसी के वजह से शायद तुम्हें कोई अच्छी धुन सूझे “

“तुम सच में बहुत आप्टमिस्टिक हो”
         हाथ में मेनू कार्ड लेते हुवे सुमित ने कहा ।

“और तुम पेरसिमिस्ट “
         उसके हाथ से मेनू कार्ड छीनते हुवे श्रुति ने कहा ।

    दोनों का कहना होने के बाद श्रुति ने जब बिल पे करने के लिए पर्स खोली तभी सुमित ने पैसे भर दिए ।

“तुम हर बार ऐसे करते हो, तुम्हारे हालात अभी अच्छे नहीं है तो क्यू ऐसा करते हो?”
“अरे बाबा, क्यू इतना चिढती हो ? तुमने बिल दिया या मैंने दिया एक ही तो बात है अब ज्यादा गुस्सा मत करो ज्यादा गुस्सा करने से चेहरे पर पींपल्स आने लगते है और डार्क सर्कल  भी आते है”
       ये सुनके श्रुति चुप बैठ गई । सुमित हसने लगा उसे पता था अगर उसे पींपल्स का डर दिखाया तो वो चुप बैठती है । वैसे ही चुप चाप  उसने बाइक चालू कर दी । श्रुति भी बिना बोले उसके पीछे बैठ गई । इस बार भी वो चिपक की बैठी । सुमित ने एक बार फिर खुशी से ऐक्सेलरैटर पर जोर दिया ।

       श्रुति को उसके घर छोड़ के अपने फ्लैट में आया । अपना शर्ट निकाला तो उसे लगा उसके जेब में कुछ है । उसने जेब में हाथ डाला तो पाँचसौ के चार नोट निकले पहले तो उसे समझ नहीं आया फिर अचानक उसके दिमाग की बत्ती जली।

“अच्छा तो ये बात है !”
         सुमित खुद से बात कर रहा था । उसे समझ आया की श्रुति इसीलिए बाइक पे चिपक कर बैठी थी ताकी उसके जेब में चुपके से पैसे डाल सके ।“
    

 
  (to be continued….)     

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