प्रीत के धागों का बंधन
रक्षा के सूत्र के बंधन
कच्चे धागों से बंधती
पक्के रिश्ते की डोर
देखो आया रे आया
भाई बहन का मौसम
किसी वादे में
शरारत है लिपटी कोई
तो किसी शरारत में बंधती डोर कोई
है हिसाब किताब का ये बंधन
किसी ने रखा गवाह माँ को
तो किसी ने छेड़ी
कोई पुरानी यादों की सरगम
रिश्तों की गहराई नापि इस बंधन ने
एक माँ के दो बच्चों को बांधा
उम्रभर के इस स्नेह में
खुशी के आसू बिछड़ने का गम
है ये रिश्तों का अनोखा बंधन
देखो आया रे आया
भाई बहन का मौसम