मैं ईश्वर हूँ

मैं आरंभ हूँ मैं अंत हूँ

मैं शून्य हूँ अनंत हूँ

जो उठा है तुम्हारे भीतर

मैं वो प्रचंड द्वयंद हूँ

मैं नाश हूँ अविनाश हूँ

मैं मृत्यु का पाश हूँ

जो चीर के अँधेरों में उठता

मैं ही वो स्वयं प्रकाश हूँ

मैं आदि हूँ अनादि हूँ

मैं ही निरीश्वरवादी हूँ

मैं दुर्योधन, अश्वथामा

मैं कान्हा ब्रिज वासी हूँ

मैं काल हूँ महाकाल हूँ

मैं महादेव विकराल हूँ

अच्छा बुरा जो भी करता

मैं ही तो स्वर्ग और पाताल हूँ

मैं यत्र हूँ मैं तत्र हूँ

धूप से बचाता छत्र हूँ

ढूंढो न मुझे यहाँ वहाँ

मैं सर्वव्यापी सर्वत्र हूँ

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