शाखों से गिरकर कैसे गुलाब निकले !
तेरे लबों से हम लाजवाब निकले !
गुजरे जब तेरी गली से हम
आखों से तेरे क्या सवाल ! क्या जवाब ! निकले
होंठों से होंठ मिले जब कुछ असर तो हुआ
कैसी है ये बेखुदी जो शराब निकले !
रातों को सोना मुमकिन नहीं है अब !
झुमके से तेरी क्या आवाज निकले !
झोंक हवा का कुछ कहता है मुझसे
पायल से तेरी अजब सा साज निकले
शाखों से गिरकर कैसे गुलाब निकले !
तेरे लबों से हम लाजवाब निकले !