होश का पानी छिड़को मदहोशी की आँखों पर, अपनों से ना उलझो गैरों की बातों पर।

जरूरी ये नहीं की आपकी उम्र क्या हैं, जरूरी ये हैं की आप किस उम्र की सोच रखते हो

अपना एक तारा, अपना एक फलक चाहिए ये  दुनिया आम है , मुझे कुछ अलग चाहिए

होश का पानी छिड़को मदहोशी की आँखों पर, अपनों से ना उलझो गैरों की बातों पर।

सदियों से जो बदनामी का बोझ ढो रही है , आज वो ही सबके हाथ धो रही है ।

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